अनन्त फैलियो यहाँ फुटेर शूक्ष्म सैकत पदार्थका कणा - कणा अनन्य शक्ति द्योतक पदार्थ - शक्ति, सृष्टिका अगण्य द्वैत संगम अनन्त्य कालको धुरी ! ब्रह्माण्ड घुम्छ फन्फन॥ ॥१॥
अनन्त भौतिकी जगत् समस्त जीव, सृष्टिका नक्षत्र, सूर्य, चन्द्रमा खगोलका निहारिका नदी, समुन्द्र, हैमका चुली, पहाड, पर्वत पदार्थ - शक्ति कै बडो बिराट रूप सार्थक ॥ ॥२॥
घना गृहै युद्ध, मुलुक भर नै बादल सरी, अनिश्चित् प्राणै भो, अब शिव हरे ज्युनु कसरी - भरै के गोलीको - पट पट कतैबाट उदर, फुर्टाई, प्राणै यो, हरण सहजै गर्न सफल ।। ।।१।।
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