“मुद्रा” जेकरा के हमनी लेनदेन के भाषा मे रुपया, पैसा, कहेनिसन एकरा बारेमे जानकारी लेहल बहुत हि जरुरी बा । काहेकी आजकाल जइसन भौतिकबादि युग मे एकर महत्व बहुत बढ गईल बा । आजकाल हमनी हरेक क्षेत्रमे मुद्राके प्रयोग भईल देखतानी सन, का ई शुरुवे से अइसने प्रयोग होत आइल बा? ना, पहिले अइसन ना रहे ।

प्राचिन कालमे मनुष्य के आवश्यकता बहुत कम रहे । पहिले मनुष्य बहुत सादा जीवन व्यतित करत रहे अउर आपन बहुत आवश्यकता शिकार अउर मछरी मार के पुरा करलेत रहे । जइसे जइसे समय बीतत गईल अउर ओकर आवश्यकता बढल, ओकर अपन आत्म–निर्भरता खतम हो गईल । धिरे धिरे उ कवनो बस्तुके उत्पादन करे लागल आ अपन उत्पादित वस्तु आपन पडोसियन से बदला बदली (विनिमय) करे लागल । अपन सामान के बदला मे दोसरा से ओकर वस्तु लेत रहे जउन ओकरा लगे ना होत रहल रहे । अइसन काल के बदलाबदली के काल अर्थात विनिमय काल कहल जाला जेमे आपन सामन देके दोसरा से अपना लगे ना रहल सामान लेहल जाला अउर ई काल मे मुद्रा के कवनो विकास ना भइल रहे । कदाचित अभियो कवनो कवनो गांव मे अइसन स्थिती देखेके मिलेला लेकिन वस्तु–विनिमय अब सामान्य रुप मे ना रहल । सभ्य संसारसन अइसन प्रणाली (System) के बर्षो पहिले त्याग देलसन । काहेकी इ प्रणाली मे बहुते कठिनाई रहे ।

आज हमनी मुद्रा के बिना जीवन के विचारे नइखि सन कर सकत । काहेकी हमनी के आवश्यकता बहुत अउर जटिल बा जेकरा चलते हमनी एगो सामान देके दोसर सामान लेके अर्थात वस्तु विनिमय करके पुरा नइखिसन करसकत । विना मुद्राके हमनी छोट छोट चीज खातिर के तरे भुगतान (Payment) करेमसन ? जइसे, साबुन, फल, तरकारी, कागज, कपडा आदि खातिर जेकर हमनी के हरदम जरुरी पडेला? के तरे हमनी कालेज के फीस भा बस के किराया देमसन का मक्खन के डिव्बा देके? भा गंहु भा चाउर देके, यदि इ सब करे लागेमसन त बडि असुविधा होइ । हमनी बडा सौभाग्यशाली बानिसन कि उ समय चल गईल आ इ दुनिया अब पहिलेखानी नइखे ।

वस्तु–विनिमयके कठिनाइ के फलस्वरुप इ ज्ञान भइल कि विनिमय मे बहुत सुगमता लियावल जा सकतबाटे बशर्ते कि विनिमय के आधार कवनो एगो वस्तु के बना लेहल जाव ।

इ रुपमे अनेक प्रकारके वस्तुसनके भिन्न भिन्न सफलता के साथ मुद्रा के तौर पर अपनाइल जा चुकल बा । दास, पशु, पत्थर, खाल, तीर, अनाज, कौडी आदिके मुद्रा के रुपमे अपनावल गईल ।
अन्तमे केहु तरे इ पता चलल की सोना अउर चांदी जइसन मूल्यवान धातु इ काम खातिर सर्वश्रेष्ठ बा । प्रारम्भमे सोना अउर चांदीके धातु पिण्ड के रुपमे प्रयोग मे लियावल गईल । एसे असुविधा होत रहे अउर प्रत्येक बेर जब उ एगो हाथ से दोसर हाथ मे जात रहे तबलोग शंका के दृष्टीसे जांच करावत रहे काहेकि लोग अइसन धातुमे मिलावट शुरु करदेवे ओकर वजन मे कमी कर देवे जइसन दोष देखा परेलागल । तब सरकार ओकरा के करैन्सी भा सिक्का के रुप देलख जेसे ओकर वजन के बारेमे लोगके विश्वास बनल रहो । कुछ समय बाद धातुके सिक्का (metallic coins) के साथे साथ कागज के मुद्रा (paper currency) के प्रचलन शुरु भइल । जेकरा के धातु मुद्रामे बदलल जा सकत रहे । धिरे धिरे धातुके सिक्का सब लोप होत गइल आ कागजी मुद्रा के ज्यादा प्रचलन होखे लागल ।

वस्तु–विनिमय से वस्तु–मुद्रा (commodity money), वस्तु–मुद्रा से कागजी मुद्रा (paper currency) अउर कागजी मुद्रा से बैंक मुद्रा अथवा साख–मुद्रा के उन्नती तथा विकास इहे प्रकार होत आइल बा ।

मुद्रा का ह ? इ सम्बन्ध मे प्रो.डी.एच. राबर्टसन कहले बानि– मुद्रा एगो अइसन चीज ह जउन अधिकतर लोगद्धारा वस्तुसन के मूल्य लेवेमे तथा अन्य प्रकार के व्यवसायीक लेन देनमे स्वीकार कईल जाला ।

क्राउथर (Crowther) के अनुसार, मुद्रा अइसन चीज ह जउन विनिमय के माध्यम के रुपमे सामान्यतया स्वीकार करल जाला अउर जउन साथ मे मूल्य के माप तथा मूल्य के संग्रह के कार्य भि करेला ।

मुद्रा अर्थव्यवस्था के प्रत्येक क्षेत्र मे सहायक होखेला । सत्य त इ बा कि मुद्रा ना होखे त सारा व्यापार व्यवसाय ठप्प ही होजाई । अंग्रेजी मे मुद्रा के कार्य के निम्न पद द्धारा व्यक्त कइल गइल बा–
Money is a matter of functions four,
A medium, a measure, a standard, a store.

मुद्राके कार्य बा केवल चार,
माध्यम, माप, मान अउर भण्डार ।

देश के केन्द्रीय बैक के नोट भा कागजी मुद्रा छापेके भा जारी करेके एकाधिकार प्राप्त रहेला । विभिन्न देशमे इ बैंक के विभिन्न नाम रहेला । नेपाल राष्ट्र बैंक हमनीके देशके केन्द्रीय बैंक ह । भारत के केन्द्रीय बैंक रिजर्व बैंक अफ इण्डिया (Reserve Bank of India) अउर बेलायत के केन्द्रीय बैंक बैंक अफ इंगलैण्ड (Bank of England) ह । भूलकाल मे केन्द्रीय बैंक के मुद्रा के जारी करल गईल मात्रा के पीछे कुछ सोना, चांदी के रक्षित निधि (reserves) के रुपमे राखेके पडल रहे । सैद्दान्ति तौर पर जारी नोटसन के पीछे सोना, चांदि राखेके आवश्यकता नइखे । इहा इ बात उल्लेखनीय बा कि आजकाल सरकार के केन्द्रीय बैंक कागजी नोटसन के सोना तथा दोसर मूल्यवान धातु मे बदल देवे के जिम्मेवार नइखे । एसे कागजी मुद्रापर जनता के बहुत विश्वास बा कहल कथनी सिद्ध होजातबाटे । मुद्राके मात्रा के नियन्त्रीत राखे खातिर केन्द्रीय बैक पर समय समय पर अनेक प्रकार के सिमा निश्चित कईल गईल बा । एमेसे एगो ह आनुपातिक आरक्षित प्रणाली (Proportional Reserve System) जउन कयगो देश मे बहुत समय तक प्रचलित रहल । इ आनुपातिक प्रणाली के अन्तर्गत देशके केन्द्रिय बैंक के जारी कइल गईल नोटसन के पीछे एक निश्चित प्रतिशत सोना, चांदि भा विदेशी प्रतिभूतिसन (foreign securities) रखेके पडेला । भारतमे जब आनुपातिक आरक्षित प्रणाली प्रचलित रहे, रिजर्व बैंकद्धारा जारी कइल गईल नोटसनके ४० प्रतिशत मूल्य के बराबर सोना चादि, सोना के सिक्का अउर स्टर्लिंग सिक्योरिटिज (sterline securities) रखत रहे । एकरा अतिरिक्त एगो शर्त इहो रहे कि कवनो समय सोना ४० करोड रुपया से कम ना होखेके चाहि । अक्तूबर १९५७ मे इ प्रणाली के बदल देहल गईल अउर एकर स्थान पर न्यूनतम आरक्षित प्रणाली (Minimum Reserve System) के अपनावल गईल जेकर अधीन रिजर्व बैंक के निर्गमित नोटसन के पीछे एगो न्यूनतम आरक्षित निधि सोना भा विदेशी प्रतिभूतिसन के रुपमे राखेके पडेला ।

भारत मे एक रुपया के नोटके छोडके शेष सभी नोट रिजर्व बैंक आफ इण्डिया जारी करेला । एक रुपया के नोट भारत सरकार के वित्त मन्त्रालय (ministry of finance) छापेला ।

२०५० श्रावण २७ गते सगूनमे प्रकाशित

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