जीवन दीपकराज सापकोटा गद्य कविता नेपाल साप्ताहिक by kbsNovember 8, 2008जीवन सधैं सम्झौता चाहना सधैं कुण्ठार् कर्म सधैं बाध्यता मन सधैं बन्धक ।