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विविध भाषाका रचना

एक नारीक समापन सँ तृप्ति भेटल

  • by
SudhaMishra

जे जनकक राजदुलारी छली
नान्हिएटामे शिवधनुष उठेली

गुणी विवेकी बलशाली छली
राज अयोध्याके महारानी छली

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ककर कतेक कमजोरी !

  • by
NandaLalAcharya-09

प्रिय चेली,
सन् २०१२ क मार्च ८ काल्ही मात्रे छल आ सेहो काहिल्ये खतम भेल । पैघपैघ नेतानेतृ आ नीति निर्मातासभ भव्य मञ्चपर भव्य बातचितसभ केलाह । ओ बातचितसभ आलिसान महलक मखमली विस्तरापर बैसक कयल गेल छल ।

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मासुमक कसुर कहिदिय हे विधाता

  • by
SudhaMishra

पिता जिनका कहल जाति छै अहिठाम साक्षात् भगवान
तहन ओ अपने जन्माओल सँ एना किए छथि अंजान?
बुझल नही छनि जिनका कनियो ककरा कहैछै नाता?
तखन ओहन मानुष किए बनैछथि किनको जन्म दाता?

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सुकेशनि (लघुकथा)

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मंदिर में भगवान कऽ प्रतिमा के आगु ठाड सुकेशनि के आँखि सँ नोर झर–झर खसई छल । तीन मास पहिले के बात सब स्मरण होमय लागल ।

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केहेन उजाड (गजल)

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NandaLalAcharya-09

केहेन उजाड जँका सुनसान देखैछी
मात्र पत्थरे छै कहाँ भगवान् देखैछी ?

नाम जपिक खाइबला भेलै बुद्धिमान्
भ्रष्ट पदलोलुप मात्रे महान् देखैछी ।

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मोन मोर हरियाल अछि

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SudhaMishra

बागबोन हरिएर गाछ वृक्ष हरिएर
माटिक हरियरी सँ नभ भेल हरिएर
हरिएर नुवामे मोन मोर हरियाल अछि
हरिएर पिएर चुरिक खनक कमाल अछि

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फागुन के रंग (गीत)

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लागल गोरी के चुनरी मे फागुन के रंग
ठोर गुलाबी ओकर खिलल अंग–अंग

खन–खन चुरी खनका कऽ फगुआ के गीत गावे
छम–छम पायल छमका कऽ सभ के नचावे
पातर डाँर लचकावे त बाजे मृदंग

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रघुवर दुलहा के

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रघुवर दुलहा के दुलहिन चान हे
राम–सीया के जोडी दिव्य समान हे

पारल अरिपन गजमोती सजाओल
शुभ–शुभ गाउ सखी छिटु दूभि–धान हे

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चार मुक्तक (हे नुतन वर्ष)

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SudhaMishra

हे नुतन वर्ष

हे नूतन वर्ष नवीन उमंग लअबिहा
जीवलेल जीवके नव तरंग लअबिहा
जुरेबा तुहु जुरायल देखि धरती गगन
कलशमे सजाक प्रह्लाद प्रसंग लअबिहा

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