विविध भाषाका रचना

मासुमक कसुर कहिदिय हे विधाता

  • by
SudhaMishra

पिता जिनका कहल जाति छै अहिठाम साक्षात् भगवान
तहन ओ अपने जन्माओल सँ एना किए छथि अंजान?
बुझल नही छनि जिनका कनियो ककरा कहैछै नाता?
तखन ओहन मानुष किए बनैछथि किनको जन्म दाता?

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सुकेशनि (लघुकथा)

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मंदिर में भगवान कऽ प्रतिमा के आगु ठाड सुकेशनि के आँखि सँ नोर झर–झर खसई छल । तीन मास पहिले के बात सब स्मरण होमय लागल ।

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केहेन उजाड (गजल)

  • by
NandaLalAcharya-09

केहेन उजाड जँका सुनसान देखैछी
मात्र पत्थरे छै कहाँ भगवान् देखैछी ?

नाम जपिक खाइबला भेलै बुद्धिमान्
भ्रष्ट पदलोलुप मात्रे महान् देखैछी ।

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मोन मोर हरियाल अछि

  • by
SudhaMishra

बागबोन हरिएर गाछ वृक्ष हरिएर
माटिक हरियरी सँ नभ भेल हरिएर
हरिएर नुवामे मोन मोर हरियाल अछि
हरिएर पिएर चुरिक खनक कमाल अछि

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फागुन के रंग (गीत)

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लागल गोरी के चुनरी मे फागुन के रंग
ठोर गुलाबी ओकर खिलल अंग–अंग

खन–खन चुरी खनका कऽ फगुआ के गीत गावे
छम–छम पायल छमका कऽ सभ के नचावे
पातर डाँर लचकावे त बाजे मृदंग

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रघुवर दुलहा के

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रघुवर दुलहा के दुलहिन चान हे
राम–सीया के जोडी दिव्य समान हे

पारल अरिपन गजमोती सजाओल
शुभ–शुभ गाउ सखी छिटु दूभि–धान हे

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चार मुक्तक (हे नुतन वर्ष)

  • by
SudhaMishra

हे नुतन वर्ष

हे नूतन वर्ष नवीन उमंग लअबिहा
जीवलेल जीवके नव तरंग लअबिहा
जुरेबा तुहु जुरायल देखि धरती गगन
कलशमे सजाक प्रह्लाद प्रसंग लअबिहा

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जापान सँ आयातीत साहित्यक विधा हाइकुक सन्दर्भ मे

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मैथिली आ नेपाली साहित्यक विविध विधा पर कलम चलाबऽ बला विनीत ठाकुरक बहुआयामिक साहित्यिक व्यक्तित्व प्रखर रुपेँ अग्रसारित भऽ रहल छन्हि ।

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पाँच मुक्तक (खेलबै होरी)

  • by
SudhaMishra

१) खेलबै होरी नव नुवामे
भरिक सिनेहिया मीठ पुवामे
खेलबै होरी हम नव नुवामे
चलि आऊ प्रीतम गाम अपन
अनुराग सजोनेछी मनुवामे

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परदेस हानिखे मन

  • by
DambarDhimal

सुखो भ्वोलि एलोङ झोला फातेङ, परदेस हानिखे
दुखो जिवन पारा पालि बाध्येता, वा बिसार्भि छानिखे,
धन सम्पत्ति खिनिं भ्वोखे दुनियाँ, बोसार्भि धावाइखे
कापालको भाग्य कर्म ग्यान लाखे, हानिखे आवाइखे ।

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बुढेसक थेघ (मैथिली कथा)

वृद्धाश्रम आ अनाथ आश्रमक चर्च छोटेसँ गप्पक क्रममे सुनैत छलहुँ । उमेरकसँग मोनमे एकटा उत्कण्ठा होइत रहल ओही ठाम जाकऽ ओतुका वास्तविक स्थिति देखवाक ।

आखिर अपना लोकसँ तिरस्कृत व्यक्तिकेँ ओही ठाम केहन अवस्थाक सामना करए पड़ैत छन्ही ।

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