मैथिली भाषा

सुकेशनि (लघुकथा)

  • by

मंदिर में भगवान कऽ प्रतिमा के आगु ठाड सुकेशनि के आँखि सँ नोर झर–झर खसई छल । तीन मास पहिले के बात सब स्मरण होमय लागल ।

Read More »सुकेशनि (लघुकथा)
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

केहेन उजाड (गजल)

  • by
NandaLalAcharya-09

केहेन उजाड जँका सुनसान देखैछी
मात्र पत्थरे छै कहाँ भगवान् देखैछी ?

नाम जपिक खाइबला भेलै बुद्धिमान्
भ्रष्ट पदलोलुप मात्रे महान् देखैछी ।

Read More »केहेन उजाड (गजल)
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

मोन मोर हरियाल अछि

  • by
SudhaMishra

बागबोन हरिएर गाछ वृक्ष हरिएर
माटिक हरियरी सँ नभ भेल हरिएर
हरिएर नुवामे मोन मोर हरियाल अछि
हरिएर पिएर चुरिक खनक कमाल अछि

Read More »मोन मोर हरियाल अछि
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

फागुन के रंग (गीत)

  • by

लागल गोरी के चुनरी मे फागुन के रंग
ठोर गुलाबी ओकर खिलल अंग–अंग

खन–खन चुरी खनका कऽ फगुआ के गीत गावे
छम–छम पायल छमका कऽ सभ के नचावे
पातर डाँर लचकावे त बाजे मृदंग

Read More »फागुन के रंग (गीत)
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

रघुवर दुलहा के

  • by

रघुवर दुलहा के दुलहिन चान हे
राम–सीया के जोडी दिव्य समान हे

पारल अरिपन गजमोती सजाओल
शुभ–शुभ गाउ सखी छिटु दूभि–धान हे

Read More »रघुवर दुलहा के
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

चार मुक्तक (हे नुतन वर्ष)

  • by
SudhaMishra

हे नुतन वर्ष

हे नूतन वर्ष नवीन उमंग लअबिहा
जीवलेल जीवके नव तरंग लअबिहा
जुरेबा तुहु जुरायल देखि धरती गगन
कलशमे सजाक प्रह्लाद प्रसंग लअबिहा

Read More »चार मुक्तक (हे नुतन वर्ष)
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

जापान सँ आयातीत साहित्यक विधा हाइकुक सन्दर्भ मे

  • by

मैथिली आ नेपाली साहित्यक विविध विधा पर कलम चलाबऽ बला विनीत ठाकुरक बहुआयामिक साहित्यिक व्यक्तित्व प्रखर रुपेँ अग्रसारित भऽ रहल छन्हि ।

Read More »जापान सँ आयातीत साहित्यक विधा हाइकुक सन्दर्भ मे
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

पाँच मुक्तक (खेलबै होरी)

  • by
SudhaMishra

१) खेलबै होरी नव नुवामे
भरिक सिनेहिया मीठ पुवामे
खेलबै होरी हम नव नुवामे
चलि आऊ प्रीतम गाम अपन
अनुराग सजोनेछी मनुवामे

Read More »पाँच मुक्तक (खेलबै होरी)
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

बुढेसक थेघ (मैथिली कथा)

वृद्धाश्रम आ अनाथ आश्रमक चर्च छोटेसँ गप्पक क्रममे सुनैत छलहुँ । उमेरकसँग मोनमे एकटा उत्कण्ठा होइत रहल ओही ठाम जाकऽ ओतुका वास्तविक स्थिति देखवाक ।

आखिर अपना लोकसँ तिरस्कृत व्यक्तिकेँ ओही ठाम केहन अवस्थाक सामना करए पड़ैत छन्ही ।

Read More »बुढेसक थेघ (मैथिली कथा)
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

हमरो वर चाहिँ हरहर महादेव

  • by
SudhaMishra

नहि चाहिँ मोरा सीताके राम सन
नहि चाहि मोरा राधाके श्याम सन
नीक लगैय हमरा गौराके प्राणनाथ
चाहिँ पतिदेव हमरो भोलेनाथ

Read More »हमरो वर चाहिँ हरहर महादेव
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
trandate

समझौता

  • by

एहेन पञ्चैती एहिसँ पहिने गाममे कहिओ भेल होए, से मोन नही पडिरहल छैक ककरो । गाममे एहेन विकट समस्यो पहिने कहिओ उपस्थित भेल हो, से गामक सबसँ बूढ आ परोपट्टाक प्रतिष्ठित व्यक्ति भुटकुन मुखियाकेँ सेहो स्मरण नही छैन्ह ।

Read More »समझौता
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

चार मुक्तक (हमरो निंद कहाँ ?)

  • by
SudhaMishra

१) हमरो निंद कहाँ ?

जागल रहलौ अँहा तँ हमरो निंद कहाँ ?
व्यक्त कलैछी अँहा हमरा शब्द कहाँ?
बिन डोरेके कसल इ मजगुत गिरह
बिनु अँहाके धडकने हमरो साँस कहाँ?

Read More »चार मुक्तक (हमरो निंद कहाँ ?)
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •