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आइगक तरसमें हमर चुल्हा

बहुत दिनसँ एकचुल्हिया ठण्डा छहि,
आँच पजारैक हिम्मत नहि छहि,
धुवाँ–धुवाँ हमर मोन छहि,
आइगक तरसमें हमर चुल्हा छहि ।१।

दुनू हातमे बन्हईन लागल छहि,
दिनानूदिन गिठ्ठा कसा रहल छहि,
लकडाउनक जुनासँ पेट सेहो बान्हल छहि,
आइगक तरसमें हमर चुल्हा छहि ।२।

हाडि–तसलाक पेनी बहुत दिनसँ उज्जर छहि,
करिया कहियाँ बनत मालूम नहि छहि,
चुल्हीघरक सलाईक काँठि सेहो स्तब्ध छहि,
आइगक तरसमे हमर चुल्हा छहि ।३।

टिनहा बाटिक आबाज सुननाई दूलर्भ छहि,
भन्सिया–म्याँ लग बौआबुच्ची नहि देखाई छहि,
सभटा एक–दोसर दिसि टुकूर–टुकूर ताकि रहल छहि,
आइगक तरसमें हमर चुल्हा छहि ।४।

समाजमें एकभगहाँ लोक बढी गेल छहि,