कहानी

आपन पराया

“तनी रास्ता छोडेम” आवाज कानमे पडते ही विभा अपन तंद्रासे जाग उठली । एगो महिला आपन गर्भवती बेटीके संगे उन्का कोच के तरफ आवत रहली । विभा एक अंगडाई लेलीन आ आपन नयां सहयात्रीलोग के तरफ देखे लगलीन ।

गर्भवती महिला के सायद आठ या नव महिना चलरहलरहे । आपन भारीभरकम शरीरके बडा मुश्किलसे संभालते अपना खातिर स्थान बनावत रहली । उनकर माईके आखनमे उनका प्रति कोफतके भाव साफस्पष्ट रहे । कोचमे ६ लोग खातिर सीट होखेला बाकी सीटके उपर दाया बायां एतना ना सामान फैलल रहे कि लागत रहे सारा शहरके लोग इहे डिव्बा मे सवार होखेवाला बा ।

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भिखारी

सांझ के समय रहे, नया सिजनके लिचि आ आम बजारमे एक दु दिनसे खुबे आवे जेसे बजार मे अउरी दिनके तुलना मे तनी भिड जादा होजात रहे । हरिहर तरकारीसे त बजारे भरल रहे ।

एकजने साहेब बहादुर अपन पत्नीसंगे तर–तरकारी किने मे लागल रलन । एतनेमे एगो लङ्गड भिखमंगा उहा पहुचल आ भिख मागेलागल । उ रह रहके औरतसे कुछ पैसा देवेके आग्रह करत रहे । बाकि साहेब बहादुर के औरत मुह करवाईन बनाके मंहटिया देत रलिन ।

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