बाबा गणिनाथजी जिवन परिचय
ई भूलोक मे धर्मके रक्षा आ आपस के वैमनश्यता दुर करे खातिर परमपुज्य बाबा गणिनाथजी अवतार लिहनी । भारत देशके बैशाली जिलाके महनार गावमे श्री मंशारामजी गंगा नदी के किनारे आपन धर्म पत्नीके साथ रहत रही । दुनु प्राणीके कवनो संतान नारहे । भगवान शिवजीके भक्त मंशारामजी सात्विक विचारके रहनी आ आपन कवनो सामाजीक काम भगवान शिवजीके उपासना आ ध्यानमे मगन होके करत रही । भगवान शिवजी उनकर उपासनासे प्रशन्न होके एकदिन रातके सपनामे आके कहनी कि हे मंशाराम तोहर उपासना पुरा भइल । दोसर दिन मंशारामजी जंगलमे गइनि त देखनी कि एगो नवजात बच्चा पिपरके गाछि के निचा रहे जे मधुर मुस्कान विखेरत रहे आ ओकर माथासे अद्वितीय अलौकिक दिव्य प्रकाश चारु ओर फैल रहल रहे जेकर प्रभावसे गाछि से मध टपकल शुरु भईल आ मध सिधे लइकाके मुहमे गिररहल रहे आ लइका हस हस के मधुपान कररहल रहे । श्री मंशारामजी उ लइका के घरे ले अइले । लइकाके दिव्य शक्तिसे गांवके लोग आश्चर्यचकित रहे काहेकि उ लइका बचपने से आपन चमत्कार दिखावल शुरु कर देले रहे ।
