“तनी रास्ता छोडेम” आवाज कानमे पडते ही विभा अपन तंद्रासे जाग उठली । एगो महिला आपन गर्भवती बेटीके संगे उन्का कोच के तरफ आवत रहली । विभा एक अंगडाई लेलीन आ आपन नयां सहयात्रीलोग के तरफ देखे लगलीन ।

गर्भवती महिला के सायद आठ या नव महिना चलरहलरहे । आपन भारीभरकम शरीरके बडा मुश्किलसे संभालते अपना खातिर स्थान बनावत रहली । उनकर माईके आखनमे उनका प्रति कोफतके भाव साफस्पष्ट रहे । कोचमे ६ लोग खातिर सीट होखेला बाकी सीटके उपर दाया बायां एतना ना सामान फैलल रहे कि लागत रहे सारा शहरके लोग इहे डिव्बा मे सवार होखेवाला बा । विभा उनकराओर एैसे देखली जैसे कहेके चाहत होखस कि इ सारा कुछ के उ जिम्मेदार नइखि । साथेसाथ उनका इहो डर सतारहल रहे कि कहि ई दुनु महिलालोग हातगोड फैलाके इनकरो स्थान ना घेरलेवे । कौनो हालतमे आपन रत्तीभर हिस्सा भी छोडेके तयार नारहली । भरल डिव्वामे भि अपना खातिर एकांत खोजत रहली ।

उनकर आपन जिंदगीमे जगहीये त ना रहे, जब होश सम्भललीन त अपना आपके एगो भरलपुरल परिवारमे पइलिन जहा चारुओर भाईबहिन रहेलोग । दादादादी आ हर समय मजमा लगाएवाला परिवारजनके कारण एतना बडका हवेली भि छोट लागत रहे । एकांत खातिर उ तरस जात रहली । ना उ कविता लिखसकत रहली आ ना उ विना हल्लाके पढाइये कर पावत रहली । जब बड भइलीन त बसमे धक्कामुक्की त कभी स्कुल जाएके समय रिक्शामे सहपाठिलोगसंगे जगह खातिर झगडा उ पुरा थाक गईल रहली । उनकरा दिमागमे एगो बात घर कलेले रहेकि उनकरा खातिर भि एगो अलग स्थान होखो एगो अलग अस्तित्व होखो । ना सिर्फ घरमे बल्कि जीवनमे भि जउन उनकर अपन होखो आ ओपर उनकर आपन एकछत्र अधिकार चले ।

विवाहित जीवनमे भि नात समय आ नात आपन साम्राज्यके उनका पता चले । उनका लागे कि विधाता उनका सर पर सायद कवनो आसमान ही नइखन लिखले । बढिया नोकरी लागते माबाबुजी उनकर झटसे हात पीला करदेलख लोग । जैसे चाहत रहेलोग कि झलदी से झलदी बेटीसे छुटकारा मिलो, कमसे कम घरके एगो कोना त खालि होई । बाकि उ जानत रहली कि कवनो अभिभावक आपन संतान खातिर अइसन ना सोचेला ।

“का तनि आपन सामान हटा नालेम” बुढ महिला आपन सहयात्रीसे बकझक करत रहली । विभा तुरंत आपन आंख बन्द करलेहलीं का मालुम अगला नम्बर कहि इनके होवे । कन्खीयाके उ नजारा देखेलगली ।

विभाके दहिने एगो बृद्ध सज्जन आ एगो महिला जउन सायद उनकर मेहरारु रहे यात्रा कर रहल रहे । विभा गौर कइले रहली कि पूरा कोच खाली ई दु बेकतके सामानसे लबालब भरल रहे । बुढउ कोचमे घुसते पताना केतना अनगिनत पोटली, अटैची आ अउरो सामान सीटके उपरनीचे, बर्थपर सजादेले रहले । यदि जगह रहित त उ झाल पर भि सामान बाध देतन । वातानुकूलित कोच भइलाके कारण झाल बचल रहे, हे भगवान लोग काहे यात्रामे एतना सामान ले के चलेला, मान घर वापस आवेके हि नइखे ।

जगहीये त उ कहियो ना बनावे पइली आ ना घेर पवली । ससुरारो अपने घर निया मिलल । दुनियाभरके नाता रिश्तेदारलोग से भरल एगो संयुक्त परिवार । मालिकके व्यवसाय अच्छा चलत रहे आ इ अपन नोकरीसे भि खुश रहली । अभाव रहे त अकेलापन के । दिनभर जेठजेठानीके लइकन धमाचोकडी करत रहे, देर राततक शोर हल्ला बनल रहत रहे । मालिक परिवारके बहुत हि मान सम्मान करत रहले । थाकहारके उ वापस घर आवत रहली आ आपन मालिक के इन्तजार करेलागस । बाकि सुरेशजे रहले लौटते हि आपन माई के चरणमे समा जास । रातके संसद निया दिनभरके कहानि, गृहक्लेशके विस्तृत चर्चा चले । एक पल एकांत के जउन मिले उहो नींद पूरा करेमे चल जाए । उ अपना आपके जंजीरमे बन्हाइल महशुस करस ।

धक्का निया लागल । गाडी छुटत रहे । उ आंख खोलली । लडकीके माई स्थान बनालेले रहे । ओकर बेटी तनि पैर पसार के बैठल रहे । विभा अपन स्थान पर कुछ और अधिकार के साथ कव्जा कइलस, कामालुम लडकी आपन थाकल गोड ओकरे चेहरा के सामने पसार दे ।

विभा जायजा लेहलख । लडकी करीब २५ बर्षके रहे । कवनो जरुरीये काम होखि नात पेटके अवस्थामे काहे यात्रा करित । लडकी के मातारीके चेहरा पर थकान रहे । उ गटागट पानी पीरहल रहे । बुढउ सज्जन काफि समयसे कवनो पोथी बांचत रहलन । शायद कवनो धार्मिक किताब रहे । रहरहके उनकर होठ बुदबुदात रहे आ कनखिसे आपन मेहरारुके तरफ देखत रहे आ उनकर मेहरारु एकटक उपर लागल बल्ब के निहारत रहली । विभाके ध्यान आइल कि उ बृद्धा जबसे ट्रेन पर चढली तब से इहे मुद्रामे बाडी मान एकाकार हो के कहीं ध्यान लगवले बाडी । अइसन प्रतित होत रहे जैसे मान उ साधना कर रहल बाडी ।

“उई” कवनो के हल्का आवाज सुनके उनकर ध्यान तनी भंग भईल आ देखली कि गर्भवती महिला आपन भारी शरिर मिलावतारीन । उनकर माई उनकर पीठ सहलावत रहली । “अभि समय नईखे भइल, चमकी,” उ उनका ढाढस बंधावत रहली । चमकी के माथा पर पसिना आगइल रहे । शायद पेट मे बच्चा जोरदार लात मरले रहे । एगो त ट्रेनमे यात्रा आ उपर से जगह के कमी अइसन मे प्रसव पीडा भी इहे ना शुरु होजाए, बच्चा ढोवल एगो झन्झट रहे आ अइसनमे चैनके सास तबतक ना आवेला जब तक कि बच्चा सकुशल इ धरती पर पदार्पण ना करलेवे ।

विभाके लइका के कवनो जरुरत ना रहे, कमसे कम आपन अलग घर बस ना जाए तबतक त नाहिये रहे । सुरेश से इ विषय पर बहुते बेर विवाद हो चुकल रहे । उहे उनकाके समझ ना सके । उ चाहत रहली कि बच्चा खुला माहौलमे पले, चाहे सासससुरके मकान नजदिके काहे ना होखो । का ओकनीके एतना सम्पन्न नारहलन कि अलग एगो अपन घर बनवा सकत ? विभा ई त ना कहत रहली कि घर एकदम अलग होजावो । सुरेशके इ बात एकदम निमन नालागे । अब एतना बडा मकान बा, माबाबुजी का सोचिहे । घर अलग करेके पक्षमे उ बिलकुल नारहे ।

विभाके नाकमे मर्चाके अचारके तेज गंध प्रवेश कर गईल । उ देखली कि चमकी के माई टिफिनसे पराठा निकालके ओपर अचार मलमलके चमकीके खियावत रहली । चमकी भि अईसे खात जात रहली कि मान आजके बाद उनका अइसन खाना नसीब होखेवाला हि नइखे । विभाके नजर कोनामे बइठल बृद्धापर परल, जे पहिले बेर हेने देख रहल रहलीन । उनकर चेहरा पर विस्मयके भाव रहे । उ शायद चमकी के कुछ समझावेके चाहत रहलीन बाकी अपनाआपके रोकले रहली । विभा देखली कि बृद्धाके मालिक के चेहरा पर कुछ राहतके निशान रहे, कि चल मेहरारुके ध्यान त भंग भइल । नात उनकर मेहरारु बल्ब के तरफ अइसन रिसर्च करत जातरहलीन कि उ थामस एडिसनके खोजके गलत साबित करेके चाहत होखस ।

विभाके आपन घरके अचारमुरव्वाके याद आवेलागल रहे जउन उनकर माई, मामि आ अन्य महिला चावसे बनावत रहे । उनकर आंगन लोकगित आ अचार बनावेवालनके खिलखिलाहट से झनझनाजाए । उनका अचारमुरव्वा त पंसद रहे खाली पसंद ना रहेत निरंतर होखत हल्ला आ रिश्तेदारनके भिड । कभीकभी त उनका लागे कि ई दुनियामे उ निराला बाडि जेकरा शोरगुल आ रिश्तेदारनके जमघट निमन नालागेला । उनकर अउर बहिन केतना झल्दी लोगनके साथ घुलमित जाए ।

“अम्मा,” एक निरीह चीख उनका पास गुंजल । चमकी अपन पेट पकडके एक ओर फैल रहलरहे । ओकर माई घबराइल ढाढस बंधावत रहली, “ले बेटी, पानी पी ले, आराम हो जाई” । उनकर माई शायद चाहत रहली कि बेटी गंतव्य पर पहुच के हि पेट के भार उतारे ।

“ई प्रसव वाला दर्द ना ह,” माई के कहत उ सुनली । ओकरो इहे लागत रहे । अब आधा दर्जन पराठा आधा किलो अचारके साथ लपक जइहन त पेट मे मरोड त होखबे करी । इ गवार औरतन के साथ इहे त परेशानी रहे ।

उनकर ससुरालके लोग कउनमारके एतना सभ्य रहे । उ घरमे आपन सहकर्मीलोग खातिर पार्टी करत रहली त सब के सब आपन आपन कोठरी से आके धमक जात रहलसन । जहा विभाके साथी बडा सभ्य तरिकासे चायकाफीके चुस्कि लेवे, उहे मामामामिके सुढरसुढरसे वातावरण गूंज उठे । ओकरा कोफतन होखे । भगवान कुछ त प्राइवेसी होखीत ।

कवनो स्टेशन आ गइल रहे । चमकी के माई, जे हनुमान चालिसा बांचत रहली, बृद्ध सज्जनके ओर देखके गुहार लगवली, “भाई साहेब, तनी हेमे पानी भरके लिया देति त…” सज्जन कुछ ना बोलले, ओकरासे पानीके बोतल लेके चलगइलन । विभाके चाय पियेके मन कइलस । उ प्लेटफार्म पर उतरके स्टलपर चाय पियते अपन कंपार्टमेन्ट पर नजर गडइले रहल । चोरीके डरसे ज्यादा ओकरा इ बात के डर रहे कि कवनो जा के उनकर सिट पर पालथी मारके ना बइठजाए । उ कवबेर रेलबे पासधारकसनके उहतरे छोटा दुरीके सफर तय करत देखलेरहे ।

ओकर नजर झालपर बइठल बृद्धापर परल, जउन फेरुसे बल्ब पर आपन ध्यान केन्द्रित करेके तयारी करत रहे । अइसन लोग विभाके बहुत पसंद रहे, जे ना केकरो के तंग करत रहे आ ना दोसरा से कवनो बात के उम्मीद राखत रहे, ना उनका खातिर पानि भरेके पडे, ना चाय लियावेके पडे । उ देखलिन कि बृद्धाके मालिक पानि भरके धिरे धिरे कोच के तरफ बढत रहलन । गार्ड हरियर झन्डा देखावत रहे । उ झल्दी से चाय पी के ट्रेन पर चढ गइलिन ।

ट्रेन फेरुसे आपन तेजी से चले लागल रहे । लोग ऊंघत रहे । बृद्ध सज्जन भि आपन चश्मा बगलमे रखके सुते लागल रहलन । चमकी एगो अजीब मुद्रामे आपन शरिरके बजावत रहलीन । चमकीके माई पर भि आलुके पराठाके नशा छाए लागल रहे । विभाके ई लोग के अवस्था देखके निंद आवे लागल । खाली बृद्ध सज्जनके मेहरारु आपन चिरपरिचित मुद्रा मे महात्मा बुद्ध बनल रहलीन ।

बंद आखमे जइसे सपना शुरु होगइल रहे । हरियालीसे भरल चायके बगान के तरफ मुह कइल, पहाड के उचाई पर एगो आलिशान उनकर मकान रहे । उ अपन बगैचामे पौधाके पानी दे रहल रहली । उनकर सुरीला संसार दुरदूरतक फैलल रहे । सूरेश भि नजाराके आनन्द उठावत आगे बढत जात रहलन कि एगो पत्थरमे ठेस लागके उ एकाएक एगो बडका गहरा खाई मे गिर पडल ।

उनकर नींद अचानक खुल गइल । करेज पर हथौडी पड रहल रहे । बाकी उनकर भयंकर सपना से भि ज्यादा भयावह चीख उनकर कानमे सुनाई पडल । सामने बइठल चमकी बहुत दर्दसे चिल्लात रहलीन । विभा चश्मा पहिनलिन त देखलिन चमकी आपन पेट पकडके हेनेहोने झुल रहल रहलीन । उनकर माई उनकाके शांत करेमे लागल रहलीन । बृद्ध सज्जन भि असमंजसमे रहले । उहो शायद अभिये जागल रहले । नजिक के कोच से भि आदमी आके जम्मा होगइल रहे, “का भइल, कवनो विमार बा का,” “अरे कवनो डाकटर के बोलाव भाई,” जगहजगह आवाज फैलगइल रहे । पुरा ट्रेनमे मान त भगदड मच गइल रहे ।

चमकी पसेना से सराबोर हो गइल रहे । ओकर माई दहाड मार मारके रोवे लागल रहे, “अरे, कवनो डाकटर बोला द, नौ वा महिना ह एकर” विभाके एकाएक खिस बढगइल । अगर नौवा महिना ह त एकराके ले के काहे चल्लखिय इ बुढिया । चमकी के साडी पुरा भिज गइल रहे । माथा पर केश बेतरतीब हो के खराब हो गइल रहे । उ आपन टांग फैलाके दर्दके मानत् पेटसे दुर गोडके निचे गिरा देवेके चाहत रहे । ओकर माई बदहवास स्थितिमे रहे । केकरो कुछो ना सूझ रहल रहे । लोग डाकटर खोजेखातिर गाडीके भितर शोर मचा देले रहल ।

“हट, सबलोग, हम देखतानी,” विभा एगो नया आवाज सुनलीन । उनकर चेहरापर विस्मयके भाव चल आयल, जब उ देखलीन कि बोलेवाली कोई और ना उहे वृद्धा रहलीन जौन अभि तक चुपचाप यात्रा कर रहल रहलीन । बृद्धा अपन मालिक के तरफ मुह करके कहलीन “तनि रउवा भिड के हटाई, इहा दु तीनगो बेड सिट बिछा दि । खाली इहा औरते रहि,” उ जैसे आपन आदेश सुना देहली । वृद्ध सज्जन आदेशके पालन करे लगले । वृद्धा कौनो दक्ष डाकटर निया चमकीके चादर पर लेटावे लगलीन । विभा अनायासे अपन जगहसे उठ गइली । वृद्ध सज्जन कोचके चारो ओर चादरके पर्दा तान चुकल रहलन । उ स्वयं वाहर रहलन आ भिड के नियंत्रित करेमे लागल रहलन ।

“कोई गरम पानी लियाई ?”वृद्धाके जबरदस्त गुहारसे कोचके बाहर लोगनमे हडकंप मचा देहलस । लोग दउरदउरके गरम पानी, डिटौल आ ना जाने कौन कौन चिज खातिर दौडे लगलन । “बेटी तनि एकराके पकडले रहिय,” विभाके भि आदेश प्राप्त हो गइल रहे । उ चमकीके बाह मजबुतीसे पकडके खडा होगइल ।

गरम पानी आ गइल रहे । “घबरामत, बेटी धीरज रख आ कोशिश कर बच्चाके निचे लावेके”। उ एगो कुशल नर्स निया चमकीके आदेश देवे लगली, “सांस ल, तनि मेहनत कर, ह, ऐहितरे ।” चमकी निढाल होत जात रहली । ट्रेन आपन पुरा रफतारसे भागल जात रहे । कोच अटेन्डेन्ट संदेश आगरा स्टेशनके खबर कर चुकल रहे । आगरा पहुचेमे अभि ४० मिनट और लागेवाला रहे । तबतक पता ना…

विभा अचानक पहसूस कइली कि उहो इ दृश्यमे खो के आपन योगदान देरहल रहली । कभी उ गरम पानीके डालस त कभि उ चमकीके माई के साथ उनकर शरिर पोछस । इ स्थितिमे जेतना कइल जाए कमे रहे ।

वाहर वृद्ध सज्जन आपन घरवालनके मोबाइलपर खबर कर रहल रलन, “ह, देखिय कि कौनो बढिया गाइनोकोलोजिस्ट साथ मे होए । स्थिति कुछ डांबाडोल लाग रहल बा ।”

वृद्ध महिलाके माथा पर पसिनाके बूंदा उमड आइल रहे । बच्चा रहे कि बाहर आवेके नामे ना लेत रहे । चमकी धक्का लगाते लगाते पस्त हो चुकल रहली । उनकर आखंमे गहरा बेदना, नींद आ बेहोसीके आलम रहे । एकाएक विभाके इ डर सतावेलागल कि कहि एकरा कुछो हो गइल त का होई । चमकीके माई त वैसेहि डरके मारे थरथर कापत रहली ।

वृद्धा उनका के डाट रहल रहली कि “इ हालतमे एकरा ट्रेनमे घुमावे कहा खातिर निकलल रहलु ह ?” मातारी के हालत खराब रहे । सिसकिया लेले के उ वदहवास होके बतावे लगली कि चमकी के इ तीसरा गर्भ ह । पहिलेके २ गो जन्मके पहिले हि नोकसान होगइल । अवकि डिलेवरी आगरा जइसन शहरमे करावे जात रहनी कि इ सब हो गइल । विभा इ देखली कि बातेबातमे वृद्धा चमकीके प्रसव से उभारे खातिर पूरा चेष्टा कर रहल रहलीन ।

अचानक चमकीके एक भयावह चीख गूंज उठल । विभाके दिल दहल गइल आ उ आपन आखं बंद क लिहलिन । बाहर सन्नाटा छा गइल रहे । विभा प्रार्थना करे लगलीन ।

विभा सुनलिन, वृद्धा चमकीके हिम्मत बंधावत रहली, “और थोडा, और तनी, ह, ऐहि तरे ।” अचानक उ आपन बंद आखंसे हि महसुस कइलिन कि वृद्धाके आवाजमे अब एक नया उत्साह जाग रहल रहे । एगो नया उम्मीद झलक रहल रहे ।

विभा धैर्य करके आखं खोलली त देखलीन उ अनोखा दृश्य । एगो जीवन गर्भ से उतरके वाहर पहलीवार सांसलेत रहे । पहिले बच्चाके मुडी लउकल आ देखते देखते चमकी के धैर्य आ वृद्धाके साहस बच्चाके सकुशल धरती पर जन्म लेत । एक अबोध बालक नया दुनियामे जन्मलेके रोवे लागल । मातारी के गर्भमे मिलल गरमी आ सुरक्षासे वंचित नवजात धरती पर असुरक्षित महसूस करके रोवेलागल । कोचमे खुशीके लहर दौड गइल । पराया रहे त का भइल, उ सबके योगदान रहे ओकरा जीवन देवेमे । चमकी के माई खुशी आ राहतसे जोरजोर से रोवत रहली । चमकी के ओठ पर भी एगो फिका लेकिन कृतज्ञतापूर्ण मुसकान रहे । उ वृद्धाके हात जोडली आ निढाल होके आंख बंद करलेहली । दर्दसे उनका अब राहत मिल गइल रहे ।

वृद्धा जच्चाबच्चाके साफ करत,संभालत चमकीके माईके समझइली कि आगे का का करेके पडी । विभाके आखं भि भर आइल रहे । इ पल एगो सपना खानी रहे । कुछ क्षण तक उ इहो भुल गइल रहली कि उनकर सिट पर कव्जा हो गइल बा । एगो नया जीवन उ सिटपर आपन अधिकार जता देलेबा । लेकिन विभाके इबात के कवनो अफसोस ना रहे । उ त बस नवजात शिशुके देखत रहगइलीन ।

मातारीबच्चाके साफ कपडा पहिना दिहल गइल रहे । कोच कवनो अस्पताल वार्ड निया महक रहल रहे । आ लोग बढचढके माबच्चा आ नानी खातीर और आरामदेह बनावे पर तुलल रहे । विभा महसुस कइली कि ओमेसे केकरो भि शायद अपन असुविधा ना खलत रहे । शायद इ मा और बेटासे उ लोग कभी दोबारा ना मिली, बाकि माहौल अइसन रहे कि जैसे उलोग के अपने घरमे कवनो जश्न हो रहल बा ।

वृद्ध सज्जनके आंखमे आसुके एक झलक दिखाइ पडल विभाके । उनकर पत्नी मुसकरात रहली लइका के देखके नजाने काहे दुनु रो पडले । विभाके लागत खुशी उलोगके आंखसे बरस रहल बा ।

आगरा स्टेशन आवेवाला रहे । उ देखली बच्चाके उपहारके रुपमे कुछ हजार रोपया त मिलीये गइल रहे । चमकीके माई बारबार भगवानके धन्यवाद देतरहली । वृद्धाके गोेड उ पकडलही रहली कि वृद्धा आपन पैर झिडक देहली ।

गाडी जैसेहि प्लेटफार्म मे प्रवेश कइलख, उनकर कोचके इर्दगिर्द भगदड मच गइल । डाकटरनी आगइल रहली । मा और बच्चाके निरिक्षण करके हिदायत देत रहली । चमकीके मरद और ओकर परिवारवाला पुरा स्टेशन पर मिठाई बाटत रहलन । रेलमे जन्मल लइका के देखेखातीर लोगनके भिड उमड गइल रहे ।

विभा इ ईन्तजारमे रहली कि भिड हटे त उ आपन घरके रास्ता लेस । उ देखलिन कि वृद्ध सज्जन आपन पोटलीसब सम्भाले लगलन । उनकर पत्नी के आंख मे पहिले जइसन विषाद छाएलागलबा । उ वारबार उ नवजातके देखस आ एगो छोट गठरीले के आपन पतिके पिछे चलदेहली ।

उलोग स्टेशनपर उतरलो नारहे कि सज्जनके संबन्धिलोगके एगो बडका जुलुस उलोग के घेर के खडा होगइल । बेदना से भरल चीत्कार वातावरणमे गुंज गइल । एगो जवान स्त्री वृद्धाके पकडके गहन बेदनामे हाहाकार करे लगली । वृद्धा स्वयं अपनाआपके संभालेमे नाकामयाब होएवाला रहली । पोटली खुल गइल रहे ।

एगो छोटासा कलश रहे वृद्धके हातमे । राखसे भरल, केकरो अन्तीम संसकारके अवशेषसे भरल । कोचमे फुसफुसाहट होखे लागल रहे । हेनेहोनेसे उडत खबर सुनके विभाके अच्चम लागल । दंगामे वृद्धके जवान बेटा मारल गइल रहे । मातापिता नागपुरसे ओकर अंतिम अवशेष के लेके घर वापस लौटत रहे लोग ।

अजीब विडंबना रहे । एक ओर नवजीवनके निर्माण त दोसरा ओर प्राणके हमेसा खातिर पंचतत्वमे विलिन करेके प्रक्रिया । आ दुनु काम उ वृद्ध आ उनकर पत्नीके हाथद्धारा सम्पन्न हो रहल रहे । वृद्धा माई अस्थिकलशके गलासे लगाके रोवत रहली, आ हेने नवजात शिशु के थमले नयां मा उ बुढ मातारी खातिर रोवत रहली जे आपन दुःखके थोडा देर खातिर अलग रखके उनकर सन्तानके जीवन देले रहली ।

नवजात शिशु अपन आखं बंद करके सुतल रहे । कुछ समय के आराम और फेर उहो इ भिडमे सामिल होजाई, अपन जगह बनावे खातिर, स्कुलमे, कालेजमे, बसमे, नौकरी खातिर धक्का खात उ अपन पहचान बनाई, खोजी अपना खातिर एगो जगह । एगो अस्तित्वके खोजमे ओकर परिवारजन भि ओकर साथ दिहे । होने वृद्धाके बेटा आपन सारा हस्ती, पहचान राखके एगो पोटलीमे समेट लेले रहे । अपन त जगह उ दोसरा खातिर छोडीये देले रहे साथ मे छोड देले रहे एगो गहरा खाई, अपन माबाप के जीवनमे एगो खाली जगह, अपन जवान पत्नीके हृदयमे, जेकरा कहियो भरल नइखे जासकत । जीवनके ई दुनु विपरित पक्ष जेकरा विभा देख रहल रलिन ।

बुढा माबाप आपन बेटाके अंतिम कुछ टुकडा समेटके जा चुकल रहेलोग । चमकी भि आपन सगासम्बन्धीके साथ निकलत रहली । विभा अपन अटैची उठवली ।

आजु घर पहुचके उ माईके इहे बतलहियन कि आफिसके काम से एक दु दिन खातिर उ नइहर आइलबाडि । इ बतावल अब आवश्यक नारहे कि उ आपन मालिकसे अनबन करके नइहर आइलबाडि । उ निश्चय कइलिकि उ सुरेशके अभि फोन करके कह देस कि उ काल वापस आ रहल बाडि, उनकर उहे बडका घरमे, जहा उनकर मांबाप, दादा, दादी, रिश्तेदार सब रहत रहेलोग । उहेलोग के विच उ अपना खातिर थोडा जगह बनइहे । सुरेश के अलगे करके उलोग के जीवनमे कवनो खाई उत्पन्न ना करिहे । अपन ससुरारवालालोग खातिर हमेशा खालिपन बनावेवाला कवनो काम नाकरिहे ।

हलका मनसे उ रिक्शावालाके आवाज देहली । उपर नजर उठाके देखली त सूर्य पहिलेके तुलनामे और तेजीसे चमकत रहे आउर उनकर सर पर रहे एगो विशाल खुला आसमान ।

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