ममता देवी कानु

आपन पराया

“तनी रास्ता छोडेम” आवाज कानमे पडते ही विभा अपन तंद्रासे जाग उठली । एगो महिला आपन गर्भवती बेटीके संगे उन्का कोच के तरफ आवत रहली । विभा एक अंगडाई लेलीन आ आपन नयां सहयात्रीलोग के तरफ देखे लगलीन ।

गर्भवती महिला के सायद आठ या नव महिना चलरहलरहे । आपन भारीभरकम शरीरके बडा मुश्किलसे संभालते अपना खातिर स्थान बनावत रहली । उनकर माईके आखनमे उनका प्रति कोफतके भाव साफस्पष्ट रहे । कोचमे ६ लोग खातिर सीट होखेला बाकी सीटके उपर दाया बायां एतना ना सामान फैलल रहे कि लागत रहे सारा शहरके लोग इहे डिव्बा मे सवार होखेवाला बा ।

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असुरक्षित गर्भपतन

समाजमे गर्भपतनके समस्या वेदकालसे आजुतक रहल बा । सुरक्षित गर्भपतनके दवाई प्रचलनमे अइलाके बाद प्रयोगकर्ता अपने जथाभावी प्रयोग करे लागल बा । औजारसे करेवाला गर्भपतनके कारण ‘साइडइफेक्ट’ लउके लगलाके बाद सरकारद्वारा २०६५ सालसे दवाईसे गर्भपतन सेवा दिहल शुरु भइल । जेकरा कारण गर्भपतन करावेवाला दवाई बजारमे बिना झन्झट सरलतासे मिले लगलाके बाद एहसे होखेवाला समस्या लेके स्वास्थ्य संस्थामे आवेवालाके सङ्ख्या भि बढे्लागल बा । केन्द्रीय परिवार नियोजन सङ्घके अनुसार केन्द्रमे प्रतिमहिना कम्तीमेभि सुरक्षित गर्भपतन सेवा लेवे खातिर ३५ जना आवेला । ओमेसे करिब पाच जना पहिले अपने दवाई प्रयोग कइलाके बाद भइल समस्या लेके आवेला ।

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महिला विरुद्घ हिंसा आ समाधान

नेपालके अन्तरिम संविधान २०६३ के धारा २० मे महिलाके हक, धारा २१ मे सामाजिक न्यायके हक, धारा १९ मे सम्पत्तिके हक, धारा १८ मे रोजगारी तथा सामाजिक सुरक्षाके हक, धारा १३ मे समानताके हकसम्बन्धी संवैधानिक हक, संविधानके प्रस्तावना, राज्यके निर्देशक सिद्धान्त तथा नीतिमे महिलाके हक अधिकार एवं समाजिक सुरक्षाके स्पष्ट व्यवस्था कइलाके बाद भि राज्यद्धारा महिला हिंसा नारोके सकला से संविधानके व्यवस्थासब कागजेमे सीमित होगइल बा । महिलाबिरुद्ध होखेवाला हिंसा जेतरे, जेतना हो रहलबा्, उ सब महिलाके हक अधिकार आ मानव अधिकार के बर्खिलाप बा । एसे जेतना भि महिलालोग प्रभावित होखेला उ सब आधारभूत चिज जइसे खाना, कपडा, रहेके स्थान, शिक्षा, स्वास्थ्यजइसन आधारभूत आवश्यकतामे स्वतन्त्र बाचेके अधिकारसे वञ्चित रहेलन ।

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