करुणा झा

सुकेशनि (लघुकथा)

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मंदिर में भगवान कऽ प्रतिमा के आगु ठाड सुकेशनि के आँखि सँ नोर झर–झर खसई छल । तीन मास पहिले के बात सब स्मरण होमय लागल ।

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KarunaJha

बुढापा (बृद्धावस्था)

व्याकुल भ हमर मन
पुछि रहल भगवान सँ
किया भटकि गेल मानव
आई अपन इमानसँ ।
बृद्ध भेनाई कोनो पाप नहि
तइयो ई विषक प्याला अछि
वृद्ध क खातिर कोनो सन्तान
आई समय नई निकालत अछि ।

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समय छैन

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समय छैन, समय छैन,
यो कुरा आजकल सबका लागि बन्यो
जसलाई सोध्नुस्, समय छैन,
हरेकलाई आजकल विशेष बन्यो ।
पढ्नका लागि समय छैन,
भेट्नका लागि समय छैन
प्रातः कालमा उठ्नका लागि समय छैन
जन्म दिने आमाबुबाका लागि समय छैन,

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