
मंदिर में भगवान कऽ प्रतिमा के आगु ठाड सुकेशनि के आँखि सँ नोर झर–झर खसई छल । तीन मास पहिले के बात सब स्मरण होमय लागल ।
सुकेशनी के केश बड् सुन्दर छल जन्महि सँ । ओकर माय ओकर केश के देखि ओकर नाम ‘‘सुकेशनी” राख्ने छल सुन्दर केश वाली सुकेशनी । गाम घर के विद्यालय सँ कक्षा ८ तक पढाई केलक आ बाल्य अवस्था में ओकर विवाह कऽ देल गेल । विवाहक किछुए, दिन कऽ बाद ओकर पति के देहान्त भऽ गेल सुकेशनी के सासुर कऽ लोक कुलटा, कुलक्षणी कहि कऽ घर सँ बाहर कऽ देलक । एकर रुप आ केश देखि कऽ फेर सँ कोनो यूवक एकरा तरफ आकर्षित नई भऽ जाय ई सोचि ओकरा केश के मुण्डन कऽ देल गेल । कुल के नाक बचाबय के नाम पर सासुर कऽ लोग बहुत दुव्र्यवहार केलक । तखन ओ अपन जान बचा राधा कृष्ण कऽ मन्दिर में आबि कऽ भगवान कऽ सोझा प्रर्थणा कऽ रहल छल ।
राधा कृष्ण कऽ प्रेम कऽ प्रभाव सँ अचानक सुकेशनी कननाइ बंद केलक आ ओकरा आँखि में नोर कऽ बदला हौसला आ हिम्मत आबि गेल । ओ प्रण केलक हम जीयब आ निक सँ जियब अपन जिनगी चाहे हमरा पुरे समाज सँ लडे किया नई पडय । आ ओ हिम्मत आ हौसला संग, मंदिर सँ बाहर आयल ।
करुणा झा
