रासस

मिथिला पञ्चकोशी परिक्रमा मेला

साधुसन्तके काँधपर मिथिला बिहारीके डोला, अउर तीर्थयात्रीके मुडीपर राशन पानीके पोका आ झाल, ढोलक, डमरुके करतल ध्वनिके साथ सीतारामके भजन करेवालनके लाइन केकरो केभि मोहित कर रहल बा ।

इ दृश्य ह – बृहत् मिथिला पञ्चकोसी परिक्रमा मेलाके श्रद्धालुलोगके । अनेकतामे एकताके विशिष्ट उदाहरणके रूपमे रहल पन्ध्रदिनके इ परिक्रमा मेला फागुन प्रतिपदासे शुरू होके पूर्णिमाके दिन सम्पन्न होला ।

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असुरक्षित गर्भपतन

समाजमे गर्भपतनके समस्या वेदकालसे आजुतक रहल बा । सुरक्षित गर्भपतनके दवाई प्रचलनमे अइलाके बाद प्रयोगकर्ता अपने जथाभावी प्रयोग करे लागल बा । औजारसे करेवाला गर्भपतनके कारण ‘साइडइफेक्ट’ लउके लगलाके बाद सरकारद्वारा २०६५ सालसे दवाईसे गर्भपतन सेवा दिहल शुरु भइल । जेकरा कारण गर्भपतन करावेवाला दवाई बजारमे बिना झन्झट सरलतासे मिले लगलाके बाद एहसे होखेवाला समस्या लेके स्वास्थ्य संस्थामे आवेवालाके सङ्ख्या भि बढे्लागल बा । केन्द्रीय परिवार नियोजन सङ्घके अनुसार केन्द्रमे प्रतिमहिना कम्तीमेभि सुरक्षित गर्भपतन सेवा लेवे खातिर ३५ जना आवेला । ओमेसे करिब पाच जना पहिले अपने दवाई प्रयोग कइलाके बाद भइल समस्या लेके आवेला ।

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