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समाजमे गर्भपतनके समस्या वेदकालसे आजुतक रहल बा । सुरक्षित गर्भपतनके दवाई प्रचलनमे अइलाके बाद प्रयोगकर्ता अपने जथाभावी प्रयोग करे लागल बा । औजारसे करेवाला गर्भपतनके कारण ‘साइडइफेक्ट’ लउके लगलाके बाद सरकारद्वारा २०६५ सालसे दवाईसे गर्भपतन सेवा दिहल शुरु भइल । जेकरा कारण गर्भपतन करावेवाला दवाई बजारमे बिना झन्झट सरलतासे मिले लगलाके बाद एहसे होखेवाला समस्या लेके स्वास्थ्य संस्थामे आवेवालाके सङ्ख्या भि बढे्लागल बा । केन्द्रीय परिवार नियोजन सङ्घके अनुसार केन्द्रमे प्रतिमहिना कम्तीमेभि सुरक्षित गर्भपतन सेवा लेवे खातिर ३५ जना आवेला । ओमेसे करिब पाच जना पहिले अपने दवाई प्रयोग कइलाके बाद भइल समस्या लेके आवेला ।

वास्तवमे महिलालोग शङ्का लगलापर विभिन्न क्लिनिकमे जचावे जाला, क्लिनिकमे यदि महिला अविवाहित जइसन लगलापर एकर उपचार इहवे होजाई कहलजाला । उहवा महिलाके स्वास्थ्य स्थितिलगायत बिना जाँच कइले दवाई दिहलजाला । दवाई प्रयोग करेके विधि नाजन्लाके कारण महिलाके समस्या भोगेके पडेला । स्वास्थ्यकर्मीके प्रत्यक्ष निगरानीमे दवाई प्रयोग करेके जगहपर प्रयोगकर्ता दवाई मिलिये गइल कहके अपने तरिकासे खाला । स्वास्थ्य संस्थामे केतना केसमे दवाई प्रयोग कइलाके बाद निरन्तर पेट दुखाइल जइसन समस्या लेके महिला आवेला, जाँच कइलाके बाद मालुम होला कि उलोगके बच्चादानि निमनसे सफा नइखे । अइसन केसमे फेरुसे बच्चादानि साफकरेके पडेला । कहियोकाल समस्या देखा परलाके बाद स्वास्थ्य संस्थामे लेजाएमे देरी भइलापर महिलाके जानो गईल घटना समाजमे देखा परल बा । बिना जनले दवाई प्रयोग कइलाकेबाद निरन्तर निचाके पेट दुखाएके, खुन बहेके,उल्टी होखेके लगायत लक्षणके बेवास्ता करके समयमेहि उपचार नाकरावल गईल त गम्भीर समस्या होसकता । असुरक्षित गर्भपतन करेके समय तरिका नामिलल त बाँँझ होखलाके साथे ज्यादा खुन बहके महिलाके मृत्युसमेत होसकता । ओहिसे सुरक्षित गर्भपतन खातिर सूचीकृत स्वास्थ्य संस्थामे जाएके चाहि । मातृ मृत्युदर घटावेके सहस्राब्दी विकास लक्ष्य रहलाके बावजुदभि नेपालमे हरेक दिन छ महिला गर्भवती तथा प्रसूतिके समयमे ज्यान गुमावत आरहलबा । एहितरे मातृ मृत्युके क्रममे असुरक्षित गर्भपतनके कारण सात प्रतिशतके ज्यान चलजाला कहके सरकारी तथ्याड्ढ देखावता ।

असुरक्षित गर्भपतनके कारण महिलामे विभिन्न समस्या देखा परलाके साथे ज्यानसमेत गुमावल स्थिति अइलाके बाद सरकार २०५२ सालसे प्रसुति गृहके ई सेवा प्रदान करेके जिम्मा देलेरहे । एहितरे २०६५ सालसे दवाईके प्रयोग करके गभर्पतन सवो प्रदान करेके उद्देश्यसे छ जिल्लामे परीक्षण सेवा शुरु कइल गइलरहे । अभि आके सम्पूर्ण सूचीकृत स्वास्थ्यसंस्थामे दवाईके प्रयोगद्वारा ई सेवा देवेके शुरु होगइलबा । नौ हप्तातकके गर्भके दवाईद्वारा पतन कइल जासकता । सङ्घके गत वर्षके तथ्याड्ढ अनुसार नेपालभर दवाई तथा औजार प्रयोग करके गर्भपतन सेवा लेवेवालाके सङ्ख्या ११ हजार ३६९ रहल बा ।

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