विनीत ठाकुर
गाम–नगर में
गाम–नगर में सोरसराबा सुनल गेल बड़ बेसी ।
लोकतन्त्र में अपन अधिकार लऽकऽ रहत मधेशी ।।
जनसंख्या सँ जनसागर में जोरल छलौं हम सीधा ।
खाकऽ हमहुं लाठी गोली पारकेलौं सबटा बाधा ।।
बटवृक्षक अंकुर बनि जनमल कतेको आशा ।
लतरल चतरल मधेस मे हेतै नै कतौ निराशा ।।
जाइत पाइत में नै ओझराकऽ चुनब असली नेता ।
विकास में लिखत नव ईतिहास मधेसक बेटा ।।
शान्ति सन्देश
ए ! शान्तिदूत परवा उड़िकऽ आ अप्पन देशमे
फैलऽवै तों शान्ति हिमाल, पहाड़ आ मधेशमे
एतऽकेँ सभ नर–नारी अछि शान्तिकेँ पूजारी
सहत कोना हिंशा पसरल अछि समस्या भारी
हिमालक अमृत जलमे मिलिगेल शोनितकेँ धारा
भेल अछि अखन शसंकित जनता नेपाली सारा
परवा छे तों सहासी पृय सभक मोनक विश्वासी
कर तोँ कोनो उपाय रहे नहि किओ बनवासी
कोरो आ पाढि
गरीब छोरि कऽ के बुझतै गरीबीके मारि ।
ओ तऽ पेटे लेल जरबै छै कोरो आ पाढि़ ।।
भेल छै स्वार्थी सब नेता अपने स्वार्थे में चूर ।
छिनलकै जे सपना सुख भऽ गेलैक कोसो दूर ।।
ओकरे पर सब मुंहगरहा करैछै ब्रह्म लूट ।
निकालै छै ओकरेसँ फाइदा करा कऽ फूट ।।
रहितै जे ओकरो लग अपन ज्ञानक बखारी ।
नै बनितै समाजक लेल दरिद्र ओ भिखारी ।।
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