फागुन के रंग (गीत)

लागल गोरी के चुनरी मे फागुन के रंग
ठोर गुलाबी ओकर खिलल अंग–अंग
खन–खन चुरी खनका कऽ फगुआ के गीत गावे
छम–छम पायल छमका कऽ सभ के नचावे
पातर डाँर लचकावे त बाजे मृदंग

लागल गोरी के चुनरी मे फागुन के रंग
ठोर गुलाबी ओकर खिलल अंग–अंग
खन–खन चुरी खनका कऽ फगुआ के गीत गावे
छम–छम पायल छमका कऽ सभ के नचावे
पातर डाँर लचकावे त बाजे मृदंग

नहि भटकु धामे–धाम राखु मानवता पर ध्यान
लागु दीन–दुखी के सेवा मे भेटत ओतही भगवान

रघुवर दुलहा के दुलहिन चान हे
राम–सीया के जोडी दिव्य समान हे
पारल अरिपन गजमोती सजाओल
शुभ–शुभ गाउ सखी छिटु दूभि–धान हे