मिथिला पञ्चकोशी परिक्रमा मेला


साधुसन्तके काँधपर मिथिला बिहारीके डोला, अउर तीर्थयात्रीके मुडीपर राशन पानीके पोका आ झाल, ढोलक, डमरुके करतल ध्वनिके साथ सीतारामके भजन करेवालनके लाइन केकरो केभि मोहित कर रहल बा ।

इ दृश्य ह – बृहत् मिथिला पञ्चकोसी परिक्रमा मेलाके श्रद्धालुलोगके । अनेकतामे एकताके विशिष्ट उदाहरणके रूपमे रहल पन्ध्रदिनके इ परिक्रमा मेला फागुन प्रतिपदासे शुरू होके पूर्णिमाके दिन सम्पन्न होला ।

चारुओर प्रमुख महादेवस्थल कल्याणेश्वर, जलेश्वर, श्रीदेश्वर आ मिथिलेश्वर रहल प्राचीन मिथिलाके राजधानीके परिक्रमाखातिर पा“च कोसके दूरीसे होखेवाला भइलासे मिथिला पञ्चकोसी परिक्रमा कहलजाला ।

शुरूमे इ परिक्रमामे पाँच दिनमे ३६ कोसके यात्रा कइलजात रहे बाँकी हेने आके सीताकुण्डके सन्त सियाराम दास एकराके पन्ध्र दिनके बनवलन ।

मिथिला महात्म्यके अनुसार मिथिलापुरीके यात्राफल निमन मानलजाला । इ यात्रामे राम आ सीताके डोलाके साथ स्वस्र्फुतरुपमे हजारो साधुसन्त एवं श्रद्धालुलोग सहभागी होखेलन ।

एक सय तीस किलोमिटरके क्षेत्रमे करेवाला इ परिक्रमा मेलामे सामिल भइलापर पापसे मुक्ति, रोगव्याधि ठिक आ जीवनके अन्तमे स्वर्गप्राप्ति होखेला अइसन जनविश्वास बा ।

अत्यन्त निष्ठा, श्रद्धा आ भक्तिपूर्वक नंगा पैर पदयात्रामे सामिल होखेवालाके ब्रह्मचार्य जीवनपालन करकेहोखेला । इतिहासकारके अनुसार इ परिक्रमा विसं १८१० मे प्रारम्भ भइलरहे । पहिले परिक्रमाके मार्गमे जड्डल रहे बाँकी अभि इहा बस्ती बा । इ परिक्रमाके डोला धनुषा जिल्लाके कचुरी गावसे उठके हनुमाननगरमे राति ठहराव होला ।

उहवे नित्यकर्म कइलाकेबाद भजनकीर्तन करके भगवान् सीतारामके पूजनपश्चात हनुमान मूर्तिके दर्शन आ आशीष लेवेके परम्परा बा । परिक्रमाके दुसरका दिन हनुमाननगरसे प्रस्थान करके बिहार प्रान्तके कल्याणेश्वर स्थानमे पहुचके कल्याणेश्वर महादेवके दर्शन कइलजाला ।

ओकेबाद गिरिजास्थानखातिर प्रस्थान करके राति ओहिजीन ठहराव आ अन्य दिन जइसन भक्तिभावमे लीन होखेके चलन बा । प्राचीन समयमे जानकी माता गिरिजास्थानमे रहल कुण्डमे स्नान करके गिरिजाके पूजाअर्चना करतरहलीन अइसन विश्वास बा ।

गिरिजास्थानसे महोत्तरी जिल्लाके मटिहानी बजारमे डोला प्रस्थान होला । मटिहानी जानकी माताके विवाहमे मटकोर कइलगइल ठावके रूपमे ख्याति प्राप्त कइले बा । मटिहानीमे इ दिन बडका मेला लागेला आ सीमापारके मधवापुरसे समेत मेला देखे श्रद्धालुलोग आवेलन ।

मटिहानीसे परिक्रमाके डोला जलेश्वर प्रस्थान करेला । जलेश्वर जलेश्वरनाथके कारण प्रसिद्ध बा । इ ठावमे भगवान् शड्ढर जलमे निवास कइलन ओहुसे अलगे धार्मिक महत्व बा ।

पञ्चमी तिथिमे जलेश्वरसे मडई कहल ठावमे परिक्रमा डोला बास करेला । इ ठाव माण्डव्य ऋषिके स्थानके रूपमे प्रख्यात बा । इहासे ध्रुवके तपोभुमि ध्रुवकुण्ड पहुचके डोला कञ्चन वन पहुचेला ।

इ ठावमे इच्छावती गड्डा आ वीरजा गड्डाके सड्डमस्थल बा । इच्छावती नदी भगवान् रामके होली उत्सव मनावेखातिर सिर्जना भइलरहे । कञ्चन वनसे परवतामे विश्राम कइलजाला, जउन पा“च पर्वतके सड्डमस्थल ह ।

परवतासे धनुषाधाममे परिक्रमा विश्राम लेवेला आ इहे ठावपर श्रीरामजीके तुरल धनुषके टुक्रा गिरलाके कारण धनुष दर्शनखातिर भि अनुकूल अवसर प्राप्त होला । दशमी तिथिमे सतोश्वर कहल जगहमे तीर्थालु रात बितावेलन । इ जगह सप्तऋषिके तपोभूमि मानलजाला ।

ओकराबाद औरही, करुणा होत फेरु कल्याणेश्वर स्थान होत विसौलमे विश्राम कइलजाला । इ जगहपर विश्वामित्रके मन्दिरमे पूजापाठ कइलजाला ।

चतुर्दशीके दिन इ जगहसे डोला जनकपुर फिर्ता आके विश्राम करके दोसर दिन अर्थात पूर्णिमाके दिन रत्नसागर, गड्डासागर, धनुषसागर, अरवाजा,विसहरा पोखरामे स्नान करके अन्तगृह परिक्रमा कइलजाला । एकराबाद मेला सम्पन्न होला ।

जीवनमे सार्थकताखातिर एकबेर अवश्य परिक्रमामे सहभागी होखेकेचाहि कहल जनविश्वास बा । शुद्ध मनसे रामसीताके जप करके भक्तिभाव कइलासे मनोकाङ्क्षा पूरा होखेला कहल मान्यतासमेत मिलेला ।

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