भोजपुरी भाषा

असुरक्षित गर्भपतन

समाजमे गर्भपतनके समस्या वेदकालसे आजुतक रहल बा । सुरक्षित गर्भपतनके दवाई प्रचलनमे अइलाके बाद प्रयोगकर्ता अपने जथाभावी प्रयोग करे लागल बा । औजारसे करेवाला गर्भपतनके कारण ‘साइडइफेक्ट’ लउके लगलाके बाद सरकारद्वारा २०६५ सालसे दवाईसे गर्भपतन सेवा दिहल शुरु भइल । जेकरा कारण गर्भपतन करावेवाला दवाई बजारमे बिना झन्झट सरलतासे मिले लगलाके बाद एहसे होखेवाला समस्या लेके स्वास्थ्य संस्थामे आवेवालाके सङ्ख्या भि बढे्लागल बा । केन्द्रीय परिवार नियोजन सङ्घके अनुसार केन्द्रमे प्रतिमहिना कम्तीमेभि सुरक्षित गर्भपतन सेवा लेवे खातिर ३५ जना आवेला । ओमेसे करिब पाच जना पहिले अपने दवाई प्रयोग कइलाके बाद भइल समस्या लेके आवेला ।

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भोजपुरीया चुटकुला

रमेशः बर्फके टुकडा हाथमे लेके गौरसे देखत रहे
सुरेशः का कररहल बाड?
रमेशः देख रहलबानि कि इ लिक कहासे होरहल बा ।

विनोदः प्रमोद आव चेस खेलल जाव ।
प्रमोदः तु चल हम स्पोर्ट जुत्ता पहिनके आवतानी ।

पत्नीः एगो भिखारी हमर बेइज्जति कइले बा ।
पतीः उ कैसे?

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शिक्षा

शिक्षा शिक्षा वाह रे शिक्षा
तु हो हव कमाल के भिक्षा
दीन के घर मे जाएके घबडा ल
सुखि के घर मे दौड के जा ल

तोहरो भइल विकाश खुब बा
चारो तरफ स्कुले स्कुल बा
नइखे कमी शिक्षक के भी
नइखे कमी भिक्षक के भी

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अपाङगलोगके स्थिति

अपाङगलोग के याद मे डिसेम्वर ३ तारिखके अन्र्तराष्ट्रिय दिवस मनावल जाला । राष्ट्रिय मानव अधिकार आयोगके अपाङगतासम्बन्धी विषयगत पुस्तिका २०६९ अनुसार नेपालके कुल जनसङ्ख्याके ७ से १० प्रतिशत आदमी कवनो ना कवनो किसिमके अपाङगता भइल अनुमान बा । ओहितरे राष्ट्रिय जनगणना २०६८ अनुसार नेपालमे अपाङगता भइल व्यक्तिलोगके सङ्ख्या लगभग साढे पाँच लाख अर्थात १.९४५ प्रतिशत मिलल बा जउन बात सम्बन्धीतलोग के तथ्यांक अनुसार ३४–३५ लाख होखेके चाहि ।

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पेड पौधासनके अदभूत दुनिया

जे तरे जनावर के अलग संसार होला, मानव के अलग संसार होला ओहि तरे पेड पौधासन के भी आपन एगो अलगे संसार होला ।
बडा दुःखके बात बा कि जे तरे मानव के, जनावर आदिके विकास, किसीम ओकरा बारेमे ज्यादा से ज्यादा जानकारी हमनीके सरलता के साथ मिल जाला ओहितरे पेड पौधासनके प्रकृती तथा ओकरा बारेमे जानकारी ना मिलेला ।
आजकालके मुख्यमुख्य समस्यासन मे जंगल के कटानी तथा पेड पौधा के बिनाश एगो प्रमुख समस्या होगइल बा ।

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महिला विरुद्घ हिंसा आ समाधान

नेपालके अन्तरिम संविधान २०६३ के धारा २० मे महिलाके हक, धारा २१ मे सामाजिक न्यायके हक, धारा १९ मे सम्पत्तिके हक, धारा १८ मे रोजगारी तथा सामाजिक सुरक्षाके हक, धारा १३ मे समानताके हकसम्बन्धी संवैधानिक हक, संविधानके प्रस्तावना, राज्यके निर्देशक सिद्धान्त तथा नीतिमे महिलाके हक अधिकार एवं समाजिक सुरक्षाके स्पष्ट व्यवस्था कइलाके बाद भि राज्यद्धारा महिला हिंसा नारोके सकला से संविधानके व्यवस्थासब कागजेमे सीमित होगइल बा । महिलाबिरुद्ध होखेवाला हिंसा जेतरे, जेतना हो रहलबा्, उ सब महिलाके हक अधिकार आ मानव अधिकार के बर्खिलाप बा । एसे जेतना भि महिलालोग प्रभावित होखेला उ सब आधारभूत चिज जइसे खाना, कपडा, रहेके स्थान, शिक्षा, स्वास्थ्यजइसन आधारभूत आवश्यकतामे स्वतन्त्र बाचेके अधिकारसे वञ्चित रहेलन ।

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नागरिक के अधिकार

मनुष्य एगो सामाजिक प्राणि ह । जेकरा समाज मे रहेके पडेला । कवनो जन्मजात भा नगर राज्यमे बसल अइसन अङ्गीकृत व्यक्ति जेकरा राज्यप्रति वफादार होखेके साथेसाथ राज्य से संरक्षण आउर आवश्यक परला पर राज्य संचालन खातिर आपन मत देवे के अधिकार बा उहे व्यक्ति उ राज्य के नागरिक होला । एगो राज्यके सीमाभितर बसोबास करेवाला प्रत्येक व्यक्तिके ओह राज्यके नागरिक कहलजाला । जवन समाजमे नागरीकके फले फुलेके व्यवस्था नइखे, जहवा उ आपन समस्त शक्तिसन के विकास नइखे करसकत, उ समाज कभी भी प्रगतिशिल नइखे होसकत । इंगलैण्ड, अमेरिका जइसन देशन के उन्नति के रहस्य उहा के नागरिकन के अधिकारसन के उपभोग तथा कर्तब्य पालन के निष्ठा ह ।

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