नागरिक के अधिकार


मनुष्य एगो सामाजिक प्राणि ह । जेकरा समाज मे रहेके पडेला । कवनो जन्मजात भा नगर राज्यमे बसल अइसन अङ्गीकृत व्यक्ति जेकरा राज्यप्रति वफादार होखेके साथेसाथ राज्य से संरक्षण आउर आवश्यक परला पर राज्य संचालन खातिर आपन मत देवे के अधिकार बा उहे व्यक्ति उ राज्य के नागरिक होला । एगो राज्यके सीमाभितर बसोबास करेवाला प्रत्येक व्यक्तिके ओह राज्यके नागरिक कहलजाला । जवन समाजमे नागरीकके फले फुलेके व्यवस्था नइखे, जहवा उ आपन समस्त शक्तिसन के विकास नइखे करसकत, उ समाज कभी भी प्रगतिशिल नइखे होसकत । इंगलैण्ड, अमेरिका जइसन देशन के उन्नति के रहस्य उहा के नागरिकन के अधिकारसन के उपभोग तथा कर्तब्य पालन के निष्ठा ह ।

कवनोभि राज्य के नागरिकन के दु प्रकारके अधिकार मिलल बहुत जरुरी बा, एक साधारण तथा दोसर राजनीतिक । साधारण अधिकारसन मे शिक्षा, आर्थिक सुविधा, भीत्तरी आउर बाहरी आक्रमण से रक्षा, न्याय, विचार आउर भाषण के स्वतन्त्रता, धार्मिक भावना भा उपासना के स्वतन्त्रता तथा पारिवारिक स्वतन्त्रता आदि आवेला । राजनीति अधिकारन के अन्तर्गत व्यवस्थापक सभासन के चुनाव मे मत देवेके अधिकार, चुनाव मे स्वयं खडा होखेके अधिकार, राज्य के कवनो पद के प्राप्त करेके अधिकार आदि आवेलसन ।

आदमी इ जग मे कुछ जन्मजात प्रवृत्तिसन के लेके उद्भुत होला । शिक्षाद्धारा जनचेतना जागेला । विकास के लहर जागेला, अकल्याणकर प्रवृत्तिसन के विरोध आउर सद्प्रवृत्तिसनके विकास होला । विना शिक्षाके जन्म से प्रतिभाशाली बालक भी आपन प्रतिभा के उपयोग ना कर सकेला । अतः राज्यके कर्तब्य ह कि प्रत्येक नागरिक के अवसर देवो कि उ शिक्षाद्धारा अपन भा आपन समाज के उत्थान कर सके । प्रत्येक नागरिक के ई अधिकार बा कि उ सरकारसे मांग करे कि शिक्षा के तरफ ज्यादा से ज्यादा ध्यान देहल जाय । वास्तवमे बिना शिक्षाके हमनी पुरा तरह से आपन मानवता के अभिव्यञ्जना भि नइखी करसकत । जवन देशमे प्रत्येक स्त्री पुरुष खातिर शिक्षा प्राप्ती के सुविधासन होई उहे देश आगे बढी ।

आदमी के अपन जीवन यापन करे खातिर सबसे पहिले भोजन, वस्त्र आउर रहेखातिर जमिन के आवश्यकता पडेला । आदमीलोग समाज के आउर समाज राज्य के, व्यवस्था एह खातिर कइले बा कि मनुष्य के ई सामान्य आवश्यकतासन के पूर्ति होत रहे । सभ्यता के इ उत्थानकाल मे भी यदि कवनो देश के व्यक्ति के पेट भर भोजन आउर शरीर पर वस्त्र ना भिली त उ देश खातिर एसे बडका कलंक दोसर का होई । सरकारके सबसे प्रथम कर्तब्य इ ह कि उ देखे देशमे कवनो व्यक्ति भूखा आउर लङ्गटे त नइखे ।

आदमीलोग आपन भा परिवारके सुरक्षा चाहेला । समाजमे रहला बसला पर ओकरा दोसरो के सहयोग चाहेला । इहे सब सुरक्षाके पहिला कदम ह । जबतक मनुष्य आपन सुरक्षा ना पाई, तबतक कवनो ठावमे ऊ बसोवास करेके ना चाहि । जन आउर धनके रक्षा भी सरकार के प्रधान कत्र्तव्य ह । कुछ लोग चोरी, डाका, लुटमार आदि के अपन रोजगारी के प्रधान साधन समझेला । सरकारके कत्र्तव्य ह कि उ अइसन व्यक्तिसन से समाज के रक्षा करे । प्रत्येक नागरिक के अधिकार बा कि ऊ आपन धनके, आपन ढंगसे उपयोग करे आउर आपन शारीरिक रक्षा खातिर निश्चिन्त रहे । ऐह रक्षा अन्तर्गत बीमारिसन आउर रोगसन से रक्षा के अधिकार भी सम्मिलित बा ।

प्रत्येक नागरिक के अधिकार बा कि जीवन के सभी क्षेत्रसन मे ओकरा साथ न्याय होखो । अगर केहु ओकर अधिकार के अपहरण कइले बा, त ऊ न्यायालयद्धारा आपन अधिकारसन के पुनः प्राप्त करके अन्यायी के दण्ड दिलासके । राज्यके नियमसन मे भेदभाव ना होखेके चाहि, कानुन के दृष्टि से प्रत्येक नागरिक चाहे ऊ कवनो जात, वर्ग भा श्रेणी के होखो, समान समझल जाय, गरिब से गरिब व्यक्ति भि सरकार से न्याय पा सके । नेपाल मे वर्तमान न्याय व्यवस्था मे धन आउर समय दुनु के बहुत व्यय होला । अंग्रेजी मे एगो कहावत बा कि अगर देर से न्याय भईल त समझ ल न्याय ना भइल । अतः सरकारके अइसन व्यवस्था करेके चाहि जेसे कम समय मे आउर कम से कम खर्च मे सबके न्याय मिल सको ।

एगो समय रहे जब राजा तलवार के शक्तिके बल से लोगके एके गो धर्मके अनुसरण करेके बाध्य करत रहे लेकिन येह युगके भौतिक सभ्यतामे धर्म के स्थान गौण हो गइल बा । एगो आदर्श गणतन्त्र भा प्रजातन्त्र मे आवश्यक बा कि सब के आपन धारणा के अनुकूल धर्माचरण करेके स्वतन्त्रता होखो, काहेकि धर्म भीतर के चीज ह, बाहर के ना । नागरिकके अधिकार होखेके चाहि कि ऊ आपन विश्वास के अनुसार मंदिर, मस्जिद भा गिरजा मे जाके उपासना करसके ।

इहा तक त सामान्य अधिकारसन के चर्चा भइल अब कुछ राजनीतिक अधिकारसन के भी चर्चा होखेके चाहि । येह गणतन्त्रमे सरकारके संगठन मे प्रत्येक व्यक्ति के हाथ होखेला । अतः प्रत्येक व्यक्ति के इ अधिकार होखेके चाहि कि ऊ नगर, प्रान्त भा केन्द्र के सरकार के संगठन मे आपन मत दे सके । येह चुनावसन मे मत देवेके अधिकार प्रत्येक बालिग स्त्री पुरुष के होखेके चाहि ।

प्रत्येक बालिग स्त्री पुरुष के चुनाव मे मतदान के साथेसाथ स्वयं भी चुनाव मे खडा होखे के अधिकार होखेके चाहि । शासन व्यवस्था मे कवनो विशेष वर्ग के एकाधिकार ना होखे के चाहि । शासक आउर शासित के जाति विशेष ना होखेला । सबके अवसर मिलेके चाहि कि चुनाव खातिर खडा होके आपन योग्यता भा लोकप्रियता के परिचय दे सके ।

कवनो पद पर नियुक्ति खातिर सबसे बडका मापदंड व्यक्ति के योग्यता होखेके चाहि । सरकारी नोकरीयन मे उहे व्यक्ति के नियुक्ति होखेके चाहि जे आपन विधा बुद्धि के कारण उ पद के योग्य होखे । इहां जातिपाति, धार्मिक विश्वास आदि के ध्यान ना राखेके चाहि ।

नेपालमे शताव्दियो से नागरिक के कर्तब्य के पालन त बडि दृढता आउर कठोरता से करावल जात रहे, लेकिन नागरिक अधिकारन के ओर कवनो शासक के दृष्टि ना गइलरहे । परिणामस्वरुप देशमे अज्ञान, अशिक्षा, निरक्षरता, भूख के व्याकुलता, वस्त्रहीनता, रोग भा अन्धसंस्कार आदि के राज्य रहे । शिक्षा, न्याय, पद, सम्मान सभी धनसे खरीदारी होत रहे आउर धनवान के संख्या नगण्य रहे । व्यक्ति के जबान आउर कलम पर सरकारके कठोर नियन्त्रण रहे आउर जे कुछो करेके चाहे ऊ कुचल देहल जातरहे । लेकिन अब अवस्था बदल गइल बा, आपन देशमे आपन राज्य बा । अतः हमनी आशा कर सकतानीसन कि अब अन्य देशन के भाति नेपालीयो के उ सभि सामान्य आउर राजनीतिक अधिकार प्राप्त होजाई जेपर राष्ट्र के सुख शान्ति निर्भर बा ।

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