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विविध भाषाका रचना

नव साल (कविता)

डोला क सिनेहक बसात
वर्षा क प्रीतक वर्षात
उगल किऋण लाले -लाल
सु- स्वागत हे नव साल

उप्जै अन्न धन बाली
पसरै सभक घर बाली
पहिर कान दुनु सोनमा
पढै धियासँग ललनमा

सीताक स्वयम्बर

मनेमन सोचि रहल सिया बेटी
नैहर छोडि धिया आब सासुर जेती
किया सजला बाबु मोर स्वयम्बर
हृदय स भचुकल हम हुनकर

देश विदेशक भूप लोक आयल
देखिएक धनुष छुबैत डरायल
रानी सुनयनाके एक आश बोँचल
केउ सपूत आयत जरूर आंगन

भेल अर्घ्यके बेर

अदभूत अनमोल पावनि छठि
आनन्द उत्सव अछि ढाकी भरि
शृगार भरल घाटबाट गाम
जँ निष्ठा स पुजब पुरत आश

खेतक उप्जल बारिक फरल
सुप कन्सुप्ती सरवा सजल
नही कुनो शास्त्र नही कुनो वेद
उगु सुरज देव भेल अर्घ्यके बेर

खायल पान मखान छ‌ै (कविता)

शुभ दशमीके बिदाइ सुखरातिके आगमन छ‌ै
आजु शरद पूर्णिमा चान सोल्ह कला सँ सजल छै

इजोरक साडीमे धर्ती गगन चमचमायल छै
सिङ्घार फूल भूमि चुमल पवन गमगमायल छै

सोना स सजल नगरी (कविता)

पण्डित बलशाली महादेवक नगरी
जिनकर छल सोना स सजल नगरी
लङ्केश्वर पति रावणके कहब कि
बिना रावणके श्रीरामक अस्तित्व कि

शूपर्णखाके छल रावण सन भाइ
बहिन लेल हरलक सीता सन माइ
दुष्ट रावणमे छल अपूर्व अच्छाइ
पवित्र सीता जे देलैन रामके लोटाइ

असङ्ख्य हुनक गुणगान हे (कविता)

एकही माँ मे बहुतो रूप सजल
असङ्ख्य हुनक गुणगान हे
काली दुर्गा चण्डी महागौरी
अपार हुनक अवतार हे

दाँत खट खट जीव लह लह
देखि काँपल भूत पिशाच हे
एक हाथ गद्दा दोसर कत्ता
राक्षसके कायल संहार हे

जितिया पावनि बड भारी (कविता)

जितिया पावनि बड भारी
धियापुताके ठोकि सुतेलनि
अपने लेलनि भरि थारी

चुरा दही लय अंगुठन करब
सभ बहिन नोतब भाइके अपन
जाबे गंगा जमुनामे पानी बहे
ताबे हमर भाइके औंरदा रहे

चलि आउ प्रीतम मधुश्रावणीमे (कविता)

कानि कानि हम लिखैत चिठी छी
चलि आउ प्रीतम मधुश्रावणीमे

नहि पुजबै पावनि ज आहा नहि एबै
छोडिक पावनि प्रीतम बैँस जेबै
पंचमीमे एलखिन बालम सभहक
कोना मस्त सुतल बौरहबा हमर

सागर छथि गुरु (कविता)

बिनु शिंष्यके गुरुके कि पहिचान?
शिष्य स भेटैछैन हुनका मान
जगके बहुत छथि ज्ञानी गुमनाम
किया कि ओ नहि बटलथि ज्ञान

गुरु छथि सागर शिष्य बुंद एक
शिष्य बने सागर पाबि गुरुके भेट
बनाक शिष्य सुवास भरल फूल
गमैक जाति गुरु बहुत दूर दुर

घटा छै घनघोर (कविता)

साखि घटा छै घनघोर
बिजुवन नाचिरहल मोर
पपिहा दादुर करे शोर
पियबा दूर छथि मोर

पवन बहि लगेल संदेश
कहल सभटा मोनक वेग
छोरु नोकरी चलु देश
गर्जे चम्के सिनेहक मेघ