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खायल पान मखान छ‌ै (कविता)


शुभ दशमीके बिदाइ सुखरातिके आगमन छ‌ै
आजु शरद पूर्णिमा चान सोल्ह कला सँ सजल छै

इजोरक साडीमे धर्ती गगन चमचमायल छै
सिङ्घार फूल भूमि चुमल पवन गमगमायल छै

कोजगरा राति अम्बे जननी घुमल घर दलान छै
प्रकटय दिवस माँ के वाहन पर सवार छै

मैयाँ भवानी लक्ष्मी रानी कमल विराजमान छै
अन्नदाता प्रेमलता वर्षायल अन्नक भण्डार छै

राधारानी कन्हैयाके दुलारी जगमे सिनेहक नाम छै
नटखट चोर मोहिनीसँग रचल महारास छ‌ै

केरा दही खाजा मुङ्गबा खायल पान मखान छै
स्वर्गो लोभित देखि यी मिथिलाक पावनीतिहार छै

सुधा मिश्र
जनकपुरधाम – ४
प्रदेश नं. २, धनुषा

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