Skip to content

अद्वितीय अछि माय (कविता)


माय त सुरुज
माय त चान
माय त धरती
माय त आसमान

माय त ब्रम्हा
माय त महेश
माय त विष्णु
माय त गणेश

माय सँ दुनियाँ
माय सँ संसार
माय सँ काँया
माय सँ प्राण

पुरुष मीत्र कहता
हमहुँ भागिन्दार
नही त कोना आओत
अही सृष्टिमे जान

बनैय वृक्ष विशाल
फेकल आँठी आम
सभके लेल कोर
बहा दुधके धार

कहाँ कुनो शब्दकोष
भेटल एही जगमे
बयान मायके करी
लिख तिनुभूवनमे

असङ्ख्य छै पहिचान
अमूल्य अछि माय
महिमा छै अपार
अद्वितीय अछि माय

सुधा मिश्र
जनकपुरधाम – ४
प्रदेश नं. २, धनुषा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *