एकही माँ मे बहुतो रूप सजल
असङ्ख्य हुनक गुणगान हे
काली दुर्गा चण्डी महागौरी
अपार हुनक अवतार हे
दाँत खट खट जीव लह लह
देखि काँपल भूत पिशाच हे
एक हाथ गद्दा दोसर कत्ता
राक्षसके कायल संहार हे
कोमल रूप छवि ममतामयी
सिनेहक चँहुदिस पथार हे
एक हाथ शङ्ख दोसर कमल
शान्तिके कायल आह्वान हे
माँ दुःखहरनी जग कल्याणी
झहरिरहल वरदान हे
एक हाथ त्रिशूल दोसर चक्र
स्वीकार करू माँ प्रणाम हे
सुधा मिश्र
जनकपुरधाम – ४
प्रदेश नं. २, धनुषा
