
लागल गोरी के चुनरी मे फागुन के रंग
ठोर गुलाबी ओकर खिलल अंग–अंग
खन–खन चुरी खनका कऽ फगुआ के गीत गावे
छम–छम पायल छमका कऽ सभ के नचावे
पातर डाँर लचकावे त बाजे मृदंग
शराबी नयना नचा कऽ मधुर रस छिलकावे
हवा मे चुनरी उडा कऽ दिल धक–धक धरकावे
लागे गजब ओकर अवीर उडाबऽ के ढंग
गोरी खेले मस्ती मे होरी चलावे पिचकारी
तन पर शोभे ओकरा भीजल रेशम के सारी
देखू मस्त यौवन मे होरी के नवीन उमंग
विनित ठाकुर
मिथिला बिहारी नगरपालिका
मिथिलेश्वर मौवाही – ३
प्रदेश नं. – २, धनुषा

