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केहेन उजाड (गजल)

  • by
NandaLalAcharya-09

केहेन उजाड जँका सुनसान देखैछी
मात्र पत्थरे छै कहाँ भगवान् देखैछी ?

नाम जपिक खाइबला भेलै बुद्धिमान्
भ्रष्ट पदलोलुप मात्रे महान् देखैछी ।

केहेन उजाड जँका सुनसान देखैछी
मात्र पत्थरे छै कहाँ भगवान् देखैछी ?

बहुत भेलै विचारके रौदी यत्रतत्र
पैग स्वरक मात्रे यसगान देखैछी ।

केहेन उजाड जँका सुनसान देखैछी
मात्र पत्थरे छै कहाँ भगवान् देखैछी ?

दोसरके छिट्की-मारि आगा बडैबालाके
कोहुलका नेपालके दरबान देखैछी ।

केहेन उजाड जँका सुनसान देखैछी
मात्र पत्थरे छै कहाँ भगवान् देखैछी ?

पसिनाके मूल्य खोजतेखोजते हम त
बडका-छोडका सबके एकसमान देखैछी ।

केहेन उजाड जँका सुनसान देखैछी
मात्र पत्थरे छै कहाँ भगवान् देखैछी ?

-नन्दलाल आचार्य

(मैथली अनुवादमा सहयोग- रामराजा सिंह राठौर, जनकपुर)

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