७३.
रातुक तारा
आकाशक दुलार
तृप्त नयन ।
७४.
सखुवा गाछ
चीर कऽ पासान के
परसे छाँही ।
७५.
बाघ आ भालू
बानर के जाल मे
खढि़या खुश ।
७६.
शान्त नदी मे
हेलैत चान देखि
खुश वसन्त ।
विनीत ठाकुर
मिथिला बिहारी नगरपालिका
मिथिलेश्वर मौवाही – ३
धनुषा, प्रदेश नं. – २
मिथिलाक्षर (तिरहुता) दुनु लिपिमे प्रकाशित कृति ‘वसुन्धरा’ हाइकु संग्रह सँ साभार :

