३३.
आन्हर साँप
मुँह मे छुछुन्नर
घोटत नहि ।
३४.
घोटि कऽ मृग
अजगर अचेत
पिबे बसात ।
३५.
साओन मास
कदम तर झूला
सखी उदास ।
३६.
विनु वर्षा के
खेत मे डोका सब
चुआबे लेर ।
विनीत ठाकुर
मिथिला बिहारी नगरपालिका
मिथिलेश्वर मौवाही – ३
धनुषा, प्रदेश नं. – २
मिथिलाक्षर (तिरहुता) दुनु लिपिमे प्रकाशित कृति ‘वसुन्धरा’ हाइकु संग्रह सँ साभार ।

