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चारिटा मैथिली हाइकु – १२ (ठिठुरल गरीबी)

20200311_BinitThakur-Haiku


४५.
सर्द बसात
ठिठुरल गरीबी
चिता पऽ बूढ़ ।

४६.
गुलाब फूल
ओहने छै सुन्दर
जेहन भाव ।

४७.
कमला स्नान
मिथिलाक भूमि पऽ
लागय स्वर्ग ।

४८.
गंगासागर
साफ जनकपुर
रहे सतत ।

विनीत ठाकुर
मिथिला बिहारी नगरपालिका
मिथिलेश्वर मौवाही – ३
धनुषा, प्रदेश नं. – २

मिथिलाक्षर (तिरहुता) दुनु लिपिमे प्रकाशित कृति ‘वसुन्धरा’ हाइकु संग्रह सँ साभार ।

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