४५.
सर्द बसात
ठिठुरल गरीबी
चिता पऽ बूढ़ ।
४६.
गुलाब फूल
ओहने छै सुन्दर
जेहन भाव ।
४७.
कमला स्नान
मिथिलाक भूमि पऽ
लागय स्वर्ग ।
४८.
गंगासागर
साफ जनकपुर
रहे सतत ।
विनीत ठाकुर
मिथिला बिहारी नगरपालिका
मिथिलेश्वर मौवाही – ३
धनुषा, प्रदेश नं. – २
मिथिलाक्षर (तिरहुता) दुनु लिपिमे प्रकाशित कृति ‘वसुन्धरा’ हाइकु संग्रह सँ साभार ।

