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चारिटा मैथिली हाइकु – १० (जीर्ण पोखरी)

20200125_BinitThakur-Haiku


३७.
जीर्ण पोखरी
मुँह बावि सितुवा
उगले मोती ।

३८.
रातुक शेर
दिन मे लटकल
उन्टा बादुर ।

३९.
साँचे टिटही
आकाश के लोकत
टाङ उठा कऽ ।

४०.
पोखरी कात
गोरल रहठा मे
घोंघही बास ।

विनित ठाकुर
मिथिला बिहारी नगरपालिका
मिथिलेश्वर मौवाही – ३
धनुषा, प्रदेश नं. – २

मिथिलाक्षर (तिरहुता) दुनु लिपिमे प्रकाशित कृति ‘वसुन्धरा’ हाइकु संग्रह सँ साभार ।

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