३७.
जीर्ण पोखरी
मुँह बावि सितुवा
उगले मोती ।
३८.
रातुक शेर
दिन मे लटकल
उन्टा बादुर ।
३९.
साँचे टिटही
आकाश के लोकत
टाङ उठा कऽ ।
४०.
पोखरी कात
गोरल रहठा मे
घोंघही बास ।
विनित ठाकुर
मिथिला बिहारी नगरपालिका
मिथिलेश्वर मौवाही – ३
धनुषा, प्रदेश नं. – २
मिथिलाक्षर (तिरहुता) दुनु लिपिमे प्रकाशित कृति ‘वसुन्धरा’ हाइकु संग्रह सँ साभार ।

