विविध भाषाका रचना

मधुर मिलनके आस यो (मैथिली गजल)

हरियर सारी हरियर चुरी हरियर छैक मास यो
मास छैक मधुमास इ मधुर मिलनके आस यो

दुर रहब नहि उचित अपन कनियाँ वियाही सँ
लौटु अपन मरैयामे कते हमरा करब उदास यो

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

हम बगियाके फूल (मैथिली गजल)

हम बगियाके फूल गमैक हृदय अँहाक जाइय
हम सिनेहक लुती सुलैग हृदय अँहाक जाइय

कारी घनगर केश जखन बादल बनी वरैसय
वादुर पपिहा गवैय भिजैत हृदय अँहाक जाइय

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

अनुरागक डोर (गजल)

मोहिनी छै अनुरागक डोर अँहु त तनिते हायब
दुरी सँ दुर दु मीत सही मोन सँ त मानिते हायब

मेसेज नहि हमरा नहि एक कल फोन सही
घरीघरी खोलि मोबाइल अँहु त देखिते हायब

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

काठमाण्डूक छठि

नेपाल आ भारतक उत्तर क्षेत्रमे हिन्दूसभद्वारा मनाओल जाएवला छठि पावनि आव नेपालक राष्ट्रिय पर्व भऽगेल अछि । ई महान पावनि नेपालक पहाड़ी क्षेत्र, उपत्यका आओर विभिन्न शहर सभमे निक आस्था, निष्ठा आ धुमधामके संग मनाओल जाइत अछि । एहि पर्वमे भगवान सूर्य देव, पौराणिक षष्ठी माता भगवती, पौराणिक वेदक देवी उषा आ प्रत्युषा (सूर्य देवक कनियाँ)क पूजा कएल जाइत अछि ।

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

बाल्यकाल

छलैह एकटा जमाना,
खुशीक नहि कुनू ठिगाना,
चन्दामामा तर जेबाक चाहना,
मुदा टाँट पर बैसल टिकुलीक दिवाना,
आहा, बाल्यकाल बहुत सुहाना ।१।

कर्चीक छडि बनाना,
मास्टरजीक टेस्ट अपने पर करबाना,
पाटी पर कारिख लगाना,
पत्थरखडी सँ कख–कबिरकान लिखना,
पढाईसँ बेसी खेलकूदक दिवाना ,
आहा, बाल्यकाल बहुत सुहाना ।२।

गोरहा खेतमे महिस चराना,
जलखोइ–कलौह भैंसबारेसंगैह खाना,
गुल्ली–डन्डी खुब खेलना,
चौपायाक ओगरबाहीमें मन लगाना,
इस्कुल जेबाक नहि चाहना,
आहा , बाल्यकाल बहुत सुहाना ।३।

पठरु, बच्छरुसंग खेलना,
आनक खेतसँ धान नोइचके लाना,
अगहायत धरि खुआबैत रहना,
कूदफान खुब करना,
टिसन नहि जेबाक अनेक बहाना,

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

चलू आजू धनकें बात करि

बजार प्रशंसाकें छहि,
मोल ओतेह प्रतिभाक नहि,
झुठफूँसकें खेती बन्द करि
चलूँ आजू धनकें बात करि
बताऊ अहाँक मित कई गोट अछि ? ।१।

चारु दिशि पसरल सिन्डिकेट छहि,
स्वतन्त्र लोकक पुछारी नहि,
भाट/पमरियाक शैली बन्द करि,
चलूँ आजू धनकें बात करि,
बताऊ अहाँक मित कई गोट अछि ? ।२।

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

लकडाउन

महामारीसँ सुरक्षित होब लेल लकडाउन
प्रत्यक्ष युद्धमे विजय होब लेल लकडाउन
अदृश्य शत्रु सँ जोगब लेल लकडाउन
अन्हार सँ इजोतमे आब लेल लकडाउन

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

विश्वमे त्राहिमाम

मठ, मन्दिर, मस्जिद चर्च देखु सभमे ताला लागल
स्वास्थ्यकर्मी सुरक्षाकर्मी रुपमे ईश्वर बाहर आयल

करी हुनकर पुजा पाठ भजन किर्तन दीप रोशन
उवाह छथि दुःख हरनी पालनहार संकटमोचन

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

‘मातृभाषा’ कि ‘मातृशक्ति’ थीक ?

‘मातृभाषा’ आ ‘मातृशक्ति’ दुई पृथ्थक बात होएत छैक । ‘मातृभाषा’ (माय केँ बोली) कोनो भी व्यक्ति केँ लेल संचार केँ प्रथम माध्यम होइत छैक । ‘मातृशक्ति’ (नारी आ देवीभक्ति सँ जुडल) महिमा मण्डन आ स्तुतिगान सँ सम्बन्धित छैक । अंग्रेजी मेँ ‘मातृभाषा’ केँ ‘मदर टङ’ आ ‘मातृशक्ति’ केँ ‘मेटरनल पावर’ के रुप मेँ परिभाषा कयल छैक । हमरा विचार सँ एतह ‘मदर’ आ ‘मेटरनल’ के अर्थ फरिछाबे पडत से नय बुझाएत अछि । हाँ, ई कही दि जे एकटा माय (मदर) सँ जुडल अछि दोसर मामा (मेटरनल अंकल) सँ जुडल बात छैक ।

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

पावनि जुडशितलक संक्षिप्त परिचय

वैशाख सकराइतके परात मिथिला – मधेशमे जुडशितल मनायल जाति छै । नव वर्ष तथा सतुवानि पावनि मनेलाक उपरान्त दोसरदिन मिथिला – मधेशमे पावनि जुडशितल मनबाक परम्परा रहियाल छै । अहिदिन घरक बुजुर्ग बासि पानी सँ घरपरिवार आ समाजक अपना सँ छोट व्यक्तिके एक चुरुक पानी सँ माथा थपथपाक जुडायल रहु कहिक आशीर्वाद दैत छै । यी देलगेल आशीर्वाद सँ लोक सालभरि जुडायल रहछै से विश्वास रहियाल छै । जुडशितलके बासि पावनि सेहो कहल जाति छै । अही पावनिमे बासि खायके परम्परा रहियाल छै । सतुवानि दिन रातिमे रान्हल वरी भात जुडशितल दिन खायल जाति छै ।

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •