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विविध भाषाका रचना

जापान सँ आयातीत साहित्यक विधा हाइकुक सन्दर्भ मे

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मैथिली आ नेपाली साहित्यक विविध विधा पर कलम चलाबऽ बला विनीत ठाकुरक बहुआयामिक साहित्यिक व्यक्तित्व प्रखर रुपेँ अग्रसारित भऽ रहल छन्हि ।

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पाँच मुक्तक (खेलबै होरी)

  • by
SudhaMishra

१) खेलबै होरी नव नुवामे
भरिक सिनेहिया मीठ पुवामे
खेलबै होरी हम नव नुवामे
चलि आऊ प्रीतम गाम अपन
अनुराग सजोनेछी मनुवामे

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परदेस हानिखे मन

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DambarDhimal

सुखो भ्वोलि एलोङ झोला फातेङ, परदेस हानिखे
दुखो जिवन पारा पालि बाध्येता, वा बिसार्भि छानिखे,
धन सम्पत्ति खिनिं भ्वोखे दुनियाँ, बोसार्भि धावाइखे
कापालको भाग्य कर्म ग्यान लाखे, हानिखे आवाइखे ।

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बुढेसक थेघ (मैथिली कथा)

वृद्धाश्रम आ अनाथ आश्रमक चर्च छोटेसँ गप्पक क्रममे सुनैत छलहुँ । उमेरकसँग मोनमे एकटा उत्कण्ठा होइत रहल ओही ठाम जाकऽ ओतुका वास्तविक स्थिति देखवाक ।

आखिर अपना लोकसँ तिरस्कृत व्यक्तिकेँ ओही ठाम केहन अवस्थाक सामना करए पड़ैत छन्ही ।

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हमरो वर चाहिँ हरहर महादेव

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SudhaMishra

नहि चाहिँ मोरा सीताके राम सन
नहि चाहि मोरा राधाके श्याम सन
नीक लगैय हमरा गौराके प्राणनाथ
चाहिँ पतिदेव हमरो भोलेनाथ

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trandate

समझौता

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एहेन पञ्चैती एहिसँ पहिने गाममे कहिओ भेल होए, से मोन नही पडिरहल छैक ककरो । गाममे एहेन विकट समस्यो पहिने कहिओ उपस्थित भेल हो, से गामक सबसँ बूढ आ परोपट्टाक प्रतिष्ठित व्यक्ति भुटकुन मुखियाकेँ सेहो स्मरण नही छैन्ह ।

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हेना देश

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LakpaSherpaSamarpit

हेना देश बडा भाग्य से इकल्लो मिलत है
तुम जहे देशमे बैठन बाले आदमी से पुछौं
माया त बडा भाग्य से ईकल्लो मिलता है
ससारमे चोखो माया लानबाले प्रेमीके पुछौं

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बन्द हड्ताल (कविता)

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DambarDhimal

नाते एता पानादाङ्को मुलुकता, या सार्भिको सासन
नेङ्को काम निम जेङ्होइ जुगता, पातेङ्हिका आसन,
हाँसु हाइ पालि द्वोकाहि थामेता, दो थुकातेबुङ ला
सासन पाकालाइको काथा हेन्सा, हि मुपातेङ ला ।

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चार मुक्तक (हमरो निंद कहाँ ?)

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SudhaMishra

१) हमरो निंद कहाँ ?

जागल रहलौ अँहा तँ हमरो निंद कहाँ ?
व्यक्त कलैछी अँहा हमरा शब्द कहाँ?
बिन डोरेके कसल इ मजगुत गिरह
बिनु अँहाके धडकने हमरो साँस कहाँ?

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नयाँ साल

वसन्त आऔ हिमाल पहाड तराईमे
फरफर पत्ता हालथै हाबासे रूखामे
इते उते लोग बैएर सब खुशीसे नाचथै
सबै मिलके खुशीसे नयाँ साल मनाथै

माघि और मेला मानथै होरी नाच गाइके
दिदी बहिनीया ददाभैया एकठिन आइके
शान्तिको सन्देश फैलामै अब सबै मिलके
अग्गु बडै राना थारू सबै भेदभाव भुलके

SiyaramKumarDas

मिथिलाक किसान

हम छि मिथिलाक किसान, किसानी हमर काम यौ
करैत छी माइटक पूजा, माइट हमर प्राण यौ
मानैत छी माइटक अपन भगवान यौ
हम छी मिथिलाक किसान, किसानी हमर काम यौ ।

होयत वर्षा तब धोती, कुर्ता, पाग लगायब यौ
हर, कोदाइर सङ्ग खेतमे पसिना बहायब यौ
रोटी, चटनी जलखै खायब यौ
हम छी मिथिलाक किसान, किसानी हमर काम यौ ।

ठंडीक एक कप गरम चाय

ठंडीक एक कप गरम चाय
देखिक ओकरा मोन मुसिकाय
छुवन सँ ओकर तन झुमिजाय
ठंडीक एक कप गरम चाय

छुवन सँ ओकर मचलल ठोर
ससरि हृदयमे कयलक भोर
अँग अँग गुदगुदायल मोर
खुशीक नहि अछि कुनो ओर

ङा केबु ठौ

ङा केबु ठौ र ङा चेबु ठौ ङे लुङ्बा लेमु
तेरी सिसाङ जबुलिङ्ला ङे लुङ्बा लेमु
हिमाल गोटा खिनो गुँरास मेदोक स्यार्नि
मखमाली र बाबरी स्यार्के ङे लुङ्बा लेमु

आहा ! सारै लेमु गण्डकी कोसी कर्णाली
हिन्नो तेरी मी मीजु रक्त सञ्चार प्रणाली
हुड्केली कालीला नोशेर्बी सेलो मेचीला
गजीङ ताम सस्कृति होएङे लुङ्बा लेमु

20210105_UshaThakur-Lekh

विनीत रचित मैथिली हाइकु पर एक विहंगम दृष्टि (समिक्षा)

विनीत ठाकुर निरन्तर क्रियाशील स्रष्टाक रुप मे एकटा परिचित तथा चर्चित नाम अछि । एहि क्रम मे ओ मैथिली हाइकु संग्रह लऽकऽ पाठक समक्ष प्रस्तुत भेल छथि । हुनक एहि कृति मे कुल १०० हाइकु संग्रहीत अछि ।

हाइकु के संग–संग ओ कविता, कथा, गीत, लेख, निबन्ध आदि विधा मे कलम चलाबऽ मे क्रियाशील छथि । मैथिली आओर नेपाली साहित्य जगत् मे हुनक बहुआयामिक साहित्यिक व्यक्तित्व खूब लोकप्रिय छनि ।

मै शहर मे घुमथौ (थारू भाषाको गजल)

सफर मैं हौ एक सफर मोए में फिर है
मैं शहर में घूम थौ, शहर मोए में फिर है

मिर टूटो घर हंसके मत देख मीर नसीब
मैंअभै टूटो नाहौ, एकघर मोए में फिर है

खूबै वाकिफ हौ दुनिया कि हकीकत से
शख्स हर घेन से बेखबर मोए में फिर है