जापान सँ आयातीत साहित्यक विधा हाइकुक सन्दर्भ मे

मैथिली आ नेपाली साहित्यक विविध विधा पर कलम चलाबऽ बला विनीत ठाकुरक बहुआयामिक साहित्यिक व्यक्तित्व प्रखर रुपेँ अग्रसारित भऽ रहल छन्हि ।
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मैथिली आ नेपाली साहित्यक विविध विधा पर कलम चलाबऽ बला विनीत ठाकुरक बहुआयामिक साहित्यिक व्यक्तित्व प्रखर रुपेँ अग्रसारित भऽ रहल छन्हि ।
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१) खेलबै होरी नव नुवामे
भरिक सिनेहिया मीठ पुवामे
खेलबै होरी हम नव नुवामे
चलि आऊ प्रीतम गाम अपन
अनुराग सजोनेछी मनुवामे

वसन्त लय अँगना सजेबै
मीठ-मीठ पुआ हम पकेबै
लाल-हरियर रंग घोरिलेबै
सब रंगक अबीर उडेबै

सुखो भ्वोलि एलोङ झोला फातेङ, परदेस हानिखे
दुखो जिवन पारा पालि बाध्येता, वा बिसार्भि छानिखे,
धन सम्पत्ति खिनिं भ्वोखे दुनियाँ, बोसार्भि धावाइखे
कापालको भाग्य कर्म ग्यान लाखे, हानिखे आवाइखे ।

वृद्धाश्रम आ अनाथ आश्रमक चर्च छोटेसँ गप्पक क्रममे सुनैत छलहुँ । उमेरकसँग मोनमे एकटा उत्कण्ठा होइत रहल ओही ठाम जाकऽ ओतुका वास्तविक स्थिति देखवाक ।
आखिर अपना लोकसँ तिरस्कृत व्यक्तिकेँ ओही ठाम केहन अवस्थाक सामना करए पड़ैत छन्ही ।
Read More »बुढेसक थेघ (मैथिली कथा)
नहि चाहिँ मोरा सीताके राम सन
नहि चाहि मोरा राधाके श्याम सन
नीक लगैय हमरा गौराके प्राणनाथ
चाहिँ पतिदेव हमरो भोलेनाथ

सम्झेघाँ आमाइं जल्मिका थामे सा:को संस्कारता
सोनाको र्हिमा चिल्का का सान्हे पबित्र संसारता

एहेन पञ्चैती एहिसँ पहिने गाममे कहिओ भेल होए, से मोन नही पडिरहल छैक ककरो । गाममे एहेन विकट समस्यो पहिने कहिओ उपस्थित भेल हो, से गामक सबसँ बूढ आ परोपट्टाक प्रतिष्ठित व्यक्ति भुटकुन मुखियाकेँ सेहो स्मरण नही छैन्ह ।
Read More »समझौता
हेना देश बडा भाग्य से इकल्लो मिलत है
तुम जहे देशमे बैठन बाले आदमी से पुछौं
माया त बडा भाग्य से ईकल्लो मिलता है
ससारमे चोखो माया लानबाले प्रेमीके पुछौं

नाते एता पानादाङ्को मुलुकता, या सार्भिको सासन
नेङ्को काम निम जेङ्होइ जुगता, पातेङ्हिका आसन,
हाँसु हाइ पालि द्वोकाहि थामेता, दो थुकातेबुङ ला
सासन पाकालाइको काथा हेन्सा, हि मुपातेङ ला ।

१) हमरो निंद कहाँ ?
जागल रहलौ अँहा तँ हमरो निंद कहाँ ?
व्यक्त कलैछी अँहा हमरा शब्द कहाँ?
बिन डोरेके कसल इ मजगुत गिरह
बिनु अँहाके धडकने हमरो साँस कहाँ?

बौवा चोरी कैरक, केलकै पास
आइ रोडप छिलैय घाँस ।
माइ बाबुक, छल कतेक आस
तोइर देलक, सब विश्वास ।
विनीत ठाकुर निरन्तर क्रियाशील स्रष्टाक रुप मे एकटा परिचित तथा चर्चित नाम अछि । एहि क्रम मे ओ मैथिली हाइकु संग्रह लऽकऽ पाठक समक्ष प्रस्तुत भेल छथि । हुनक एहि कृति मे कुल १०० हाइकु संग्रहीत अछि ।
हाइकु के संग–संग ओ कविता, कथा, गीत, लेख, निबन्ध आदि विधा मे कलम चलाबऽ मे क्रियाशील छथि । मैथिली आओर नेपाली साहित्य जगत् मे हुनक बहुआयामिक साहित्यिक व्यक्तित्व खूब लोकप्रिय छनि ।