छिलैय घाँस (कविता)

  • by
ShyamPritMandal

बौवा चोरी कैरक, केलकै पास
आइ रोडप छिलैय घाँस ।

माइ बाबुक, छल कतेक आस
तोइर देलक, सब विश्वास ।

पढाइ छोइरक, मारैल गेल माछ
केलक जिन्दगी क, सत्यानास ।

लफुवा छौरा संग, घुमलै भोर साँझ
बिरी सिगरेट पिलकै, पिलकै गाँजा भाँङ ।

बाबुजी क बटुवा चोरै, कोठी क धान
चोटै भ्याँ, बहिनक, घर भेल समसान ।

घरेघर चोरी करै, करै नीच काम
बहिन बेटिक जिस्काबै, रस्ताम करै परेसान ।

गामगाम मे, केलक गामोक नाम बदनाम
करतै कि जब नै कर आबै कोनो काम ।

बौवा चोरी कैरक, केलकै पास
आइ रोडप छिलैय घाँस ।

– श्यामपृत मण्डल
नर्घो-३ सप्तरी

(कुलतमा परेर पढाइ छाड्नेहरुले बुवाआमाका साथै गाउँकै बदनाम गर्न पुग्छन् र आफ्नो भविष्य पनि अन्धकारमा पार्छन् भन्ने भाव व्यक्त भएको मैथिली भाषाको कविता ।)

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