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एहेन पञ्चैती एहिसँ पहिने गाममे कहिओ भेल होए, से मोन नही पडिरहल छैक ककरो । गाममे एहेन विकट समस्यो पहिने कहिओ उपस्थित भेल हो, से गामक सबसँ बूढ आ परोपट्टाक प्रतिष्ठित व्यक्ति भुटकुन मुखियाकेँ सेहो स्मरण नही छैन्ह ।

सात टोलक ई पैघ गाम, प्रत्येक टोलमे अलगे (अलग समुदाय । अलगे (अलग जातिक बसोवास । तीस (पैन्तीस घर चमारसभकें कोनो समस्या होइत छल तऽ मङ्गनु रामे ओकर तसफिहा कऽ लैत छल । तहिना दुसधटोलिक पञ्च छल मङ्गल पासवान । गामक पश्चिममे रहल डोमसभक झगड़ा (झँटीकें फरिछेबाक लेल ओकरासभक अपने मैञ्जन छल । डोमसभक विआह (गौना, गामक खरीद (बिकरी आ सुधिभरना आदिक काज करबाक लेल आन जातिक काज बेसी काल नहिएँ पड़ैत छल । ओसभ अपने सलटा लैत छल सभटा झौल । इएह अवस्था छल धोबिआही, कोरिआनी, गोढिआरी आ बनियाँपट्टिक ।

एकटा आओरो गप छलैक । प्रत्येक टोलक एक (एक टा मुपुरुख अवश्ये छलैक, जकर गपपर सभ क्यो चलैत छल ओही टोलक । इएह कारण छलैक जे कोनो चुनाओमे ठाढ भेनिहार उमीदवारके घरे (घरे जा कऽ मेहनति नही करए पड़ैत छलैक । दशे (पन्ध्रह मिनटमे सौंसे टोलक बैसकीकें सम्बोधित कऽ कए ओही एकटा मुपुरुखक जिम्मा रहैत छल सभटा भोट हसौन्तबाक । बस सौंसे टोलक भोट सुनिश्चित । इएह कारण छल जे सातो टोलक लोकक बैसकी एक्कही ठाम कहिओ देखल नही गेल छल आ तएँ आइ डिहबार थानक गाछी तरमे भऽ रहल एही बैसारकें बेसी महत्वक सँग देखल जा रहल छल ।

दलित अधिकारक लेल कार्यरत एकटा गैर सरकारी संस्थाक जिलास्तरीय नेताक उपस्थिति होएबाक छल । ओएह संस्था सात (आठटा दरी आ एकटा लाउडस्पीकरक व्यवस्था कएने छल । माइकक आगाँ ठाढ भऽ सन्तोष रमण नामक एकटा नवयुवक बाजनाइ प्रारम्भ कएलक : “आदरणीय ग्रामवासी ! सभकें स्वागत अभिवादन ! सभ गोटे अपन अपन स्थान ताकि कऽ बैसि जाऊ । कुच्छे देरमे बैसकिक कार्रवाइ शुरु हएत । नेताजी विक्रान्तजिक आगमन भऽ रहल अछि । तकर वाद मुख्य गपक शुरुआति हएत आ पञ्चैती प्रारम्भ हएत ।” लोकसभ ताली बजौलक ।

विक्रान्त नेताजिक उपनाम छल । असल नाम छलन्ही : जगमोहन राम । मुदा एही क्षेत्रक प्रखर परिवर्तनधर्मी नेतासभमे हिनको गिन्ती छलन्ही । एही गपक निक चर्चा छल जे युगान्तकारी सशस्त्र संघर्षमे इहो सहभागी भेल छलाह । जनसेनामे छलाह कहाँदन ई, नीके पदमे । आब दलित अधिकारक संरक्षणक उद्देश्यसँ एकटा एनजीओ चला रहल छथि आ कहाँदन समाजक रूपान्तरणमे अभियन्ताक भूमिका निर्वहन कऽ रहल छथि ।

माइकपर उद्घोषण कऽ रहल सन्तोष रमणक असली नाम सञ्जीव राम अछि । समाजमे रहल जातीय भेदभावक प्रति विद्यार्थीए जीवनसँ विद्रोही चरित्र रखनिहार सन्तोष समाज रूपान्तरणक लेल दूटा विआह कएलनि आ दूनू पहाड़ी मूलक कन्यासँ । ओना पहिनुक पत्नी विआहक एक सालक वाद हिनका छोडि देलकनि आ दोसरकें विआहक छओ मासक वाद ई छोडि देलनि । एही दूनू विआह करबामे हिनक तर्क छलनि : पहाड़ी मधेशिक बीचक भेदभावकें अन्त कऽ वर्गीय विभेद अन्त कएनाइ । दोसर गप ईहो तर्क छलनि जे तथाकथित दलितक विआह जँ ब्राह्मण कन्यासँ हएत तऽ जातीय समानता स्थापित हएत । कारण जे रहल होए ई दूनू विआह असफल भऽ गेलाक बादो ई हारि नही मानलनि अछि आ आब मधेशिए मूलक कोनो अन्तर्जातीय कन्याक खोजमे ई लागल छथि । हिनका दृष्टिमे परिवर्तनक परिभाषे छल : समाजक रीत आ परम्पराकें तोड़नाइ । इएह कारण छल जे अपन अग्रगामी रूपान्तरणक लेल ई परिवर्तनधर्मी आ शोषण विरोधी जनसमुदायमे बहुते आदर आ सम्मान पओने छथि ।

पञ्चैतीमे अबेर भऽ रहल छल । भोरे साते बजेसँ पञ्चैती शुरु होएबाक गप कहल गेल छल । पञ्चैतिक विषयवस्तुए एतेक गम्भीर छल जे अपन (अपन काज उद्यम छोडि कऽ लोकसभ आधा घण्टा पहिनहिसँ जम्मा भऽ गेल छल डिहबार थानक फूलवाडिमे । समुच्चे गाम, सातो टोलमे ढोलहा दिआओल गेल छल, एही पञ्चैतीमे अएबाक लेल । तएँ पुरुषलोकनिक कोन चर्चा, स्त्रीगण, बालक (वालिकालोकनि सेहो उपस्थित छल ओतए । शनिदिन होएबाक कारणें ककरो कोनो पेशागत दिक्कतिओ नही छल । आठ बाजिरहल छल । लोकसभ अगुताए लागल छल आब ।

एतबेमे जीपक हौर्न बाजल । लोकसभ देह सरिएलक । एम्हर (ओम्हर ठाढ भेल लोकसभ सेहो जगह ताकि कऽ बैसए लागल । जीप डघरक कातेमे पीपर गाछ तर रुकल । जीपमेसँ छओ (सातटा प्लास्टिकक कुर्सी आ एकटा टेबुल उतारल गेल । कुर्सीसभ माइकक दक्षिण दिश राखल गेल आ बीचमे टेबुल राखि देल गेल । चारि गोटे अञ्चिन्हार लोकसभक सँग विक्रान्तजी उजरा पैजामा आ उजरे हाफ बाँही बला कुर्ता लगौने सभकें हाथ जोड़ैत अभिवादन करैत बीचला कुर्सी पर बैसि गेलाह । भोम्ह धरि झाँपए बला करिआ चस्मा ओ कोम्हर ताकए छलाह, से स्पष्ट नही होमए दऽ रहल छल । अञ्चिन्हार चारू गोटे कुर्सीसभपर बैसि गेलाह ।

माइक हाथमे लैत सन्तोष रमण बाजए लगलाह : आदरणीय जनसमुदाय ! अपनेंसभक बीचमे नेताजी आबि चुकल छथि । ताली बजा कऽ स्वागत करै जाऊ । ताली बाजल । नेताजी सेहो हाथ हिला कऽ प्रत्युत्तर देलनि ।

सन्तोष बाजल : आब, गामक सबसँ वयोबृद्ध भुटकुन मुखियाकें आग्रह करैत छी जे ओ कुर्सी पर आबि कऽ बैसि जाइथ । एखन धरि भुटकुन मुखिया दरी पर बैसल छलाह, आब एकटा कुर्सी पर बैसिरहलाह ।

भुटकुन मुखियाक वास्तविक नाम भुटकुन महतो थिक । पञ्चायती व्यवस्था लागू भेलाक वाद भेल गाउँ पञ्चायतक पहिल चुनाओमे ओ निर्विरोध प्रधानपञ्च निर्वाचित भेल छलाह । ओही बेर एखनुका जकाँ भोट नही खसाओल गेल छल । एही डिहबार थानक गाछ तर जम्मा भेल सौंसे गौआँसभ हाथ उठा कऽ पचीस वर्षक भुटकुनकें बना देने छल प्रधानपञ्च । तहिआसँ ओ भऽ गेलाह भुटकुन मुखिया । तकर वाद फेरो ओ कहिओ ठाढ नही भेलाह चुनाओमे, मुदा ओ आजन्म मुखियाक पदवीसँ विभूषित भऽ गेलाह । एखनहुँ ओ परोपट्टाक लोकसभक बीच आदरणीय छथि । शुरुहेसँ तरकारी (खेतीकेँ. व्यवसाय बनौनिहार भुटकुन गामक सबसँ सम्पन्न व्यक्तिमे गनल जाइत छथि । पाँचटा बेटासभमेसँ दूटा कतारमे कमबैत अछि । दूटा गामेमे परम्परागत पेशामे अछि । एकटा बेटा सशस्त्र संघर्षमे सेनाक हाथें मारल गेल कहाँदुन ।

लोकसभ कचबच करए लागल छल आब । तखने भुटकुन मुखिया ठाढ भेलाह । माइक हुनका आगाँ रखबाक प्रयास कएल गेल, मुदा ओ हाथक इशारासँ रोकि देलनि । ओ कहलनि : हम बिनु माइके बाजब । कारण पुछला पर ओ कहलनि : हमरा छातीमे बैट्री (पेसमेकर) लागल अछि आ बिजली बला समान प्रयोग पर रोक लगौने अछि डाक्टर ।

ओ बजनाइ शुरु कएलनि : रौ गोबिना ! किएक तों सौंसे गाम लोककें जम्मा कएलें ? कि गप छौ, से बाज !

गोबिना अर्थात गोविन्द राम ठाढ भेल दछिनवारी कातसँ । ओकर सङ्गही एक गोटे आओरो ठाढ भेल । ओ छल गोविन्दक भातिज : रामचरण राम । पचीस (छबीस वर्षक वयस, सोंटल देह, भुलकार करिआ मोंछ, । मुदा ओकर कपार पर पट्टी बान्हल छल ।

गोविन्द बाजल : सबकें सलाम ! मुखिया मालिक ! ई हमर भातिज रमचरनाक कपार पर पट्टी देखए छिएक ? कौल्हकी राति एकरा बलदेव दासक बेटा (भातिजसभ अपना हिच्छें मारलक अइ । कपार फूटि गेल आ पीठ पर दू (दू दालि कऽ फूटि गेल अछि । बाँसक फठ्ठासँ मारलक अछि इसब । हमर बेटा सोनमा बचबए चाहलक, तऽ ओकरो इसभ मारए लागल । ई तऽ धन्न कही जे ओ भागि गेल आ हल्ला कएलक । हमसभ जँ नही जुमि जाइतौं तऽ एकटा लहास तऽ खसले छल ।

लोकसभ सोनमा अर्थात सोनेलाल दिश ताकलक, जे एक बेर मुड़ी उठा कऽ फेरो खसा नेने छल ।

किछु काल तऽ सभ गुम्म भऽ गेल । तकर वाद लोकसभ कनफुस्की करए लागल : एना कोना ककरो मारि देत केओ ? ई तऽ अन्याय थिक ।

विक्रान्त कन्हुआ कऽ चारू दिश ताकिरहल छल । लगैत छल जे ओ वलदेव दासक समाङ्गसभकें ताकिरहल हो ।

एकटा हरिजन नेता बाजल : हमराआओरके आब अत्याचार नइँ सहबै, मुखियाजी । एइ बातक तसफीहा कइए दिऔ आइ । नइँ तऽ हमरा आओर थाना कचहरी जाएब ।

“हँ, हँ, एइ बेर नइँ छोड़ब । जे हेतै से देखबै,” एकटा युवक बाजल ।

उद्घोषण कऽ रहल सन्तोष रमण बीचहिमे माइक पर बाजल : मुखिया बबा, ई दासजी परसूएसँ हमरा आओर पर महुराएल अछि ।

“किएक ?” मुखियाजी बाजल ।

“बलदेव दासक गोली गाए परसू मरि गेल । गरगट्टा लागल छल कहाँदन । दासजिक बेटा आएल छल चमराही मरीकें उठा कऽ फेंकि देवाक लेल कहबाक लेल । मुदा ओसभ नही मानलक । इसभ तखने अन्टसन्ट कहीं कऽ खिसिआ कऽ चल गेल छल ।

एतबा सुनितही विक्रान्त बमकि गेलाह । माइक अपना आगाँ आनि कऽ ओ कहलनि : ई कोन जुलुम कहलक गोविन्द राम ? सैब किओ तऽ बुझबे करै छी जे मरी उठेनाइ, मरल मालजाल छुनाइ, ढोल बजौनाइ हमसभ छोडि देने छी । ई काजसभ छोटहा काज छिएक ।

एक गिलास पानी पीबि कऽ विक्रान्त तऽ बैसि गेलाह, मुदा वातावरण बहुते गम्भीर बनी गेल ।

मुखियाजीकें सेहो तामस उठि गेल छल । ओ बाजल : हौ बलदेव भाए ! तोहर धिआपुतासभ तोरा कहलमे छह कि नही ?

“जी मुखियाजी,” स्वर वलदेवक छल ।

मुखियाजिक स्वर कनेक जोर भेल :“आइँ हौ, तऽ तोहर समाङ्गसभ किएक मारलक गोबिनक धिआपुताकें ?”

बलदेव कनेक आगाँ आएल आ बाजल : “मुखिया मालिक ! कनेक गोबिनकें पुछियौक जे एकर भातिज परसू रातिमे हमर धार कातक अल्हुआ खेतमे कि करए लेल गेल रहए ?”

भुटकुन मुखिया ताकलक गोविन्द दिश, मुदा ओ किछु नइँ बाजल । सबहक नजरि ओम्हरही छल, मुदा नइँ तऽ गोबिने आ ने ओकर केओ समाङ्गे किछुओ बाजिरहल छल ।

ककरो किछु नही बाजैत देखि वलदेव बाजल : “मालिक, हमहीं सबटा खेरहा कही ?”

मुखियाजी इशारासँ अनुमति देलनि ।

बलदेव कहए लागल : “सकल समाज, सुनए जाऊ । अपना आओरक समाजमे सैब दिनसँ ई चलनि अछि जे ककरो कोनो माल–मवेशी जँ मरैत अछि तऽ चमरटोलीमे खबरि कएल जाइत अछि आ हमरासभक फाँटमे पड़ल व्यक्ति मालजालक मरीकें उठा कऽ कुखेतमे लऽ जा कऽ ओकर चमड़ा निकालि कऽ तकरा बेचल करैत अछि । एम्हर किछु दिनसँ एइपर रोक लगा देल गेल अछि, किछु नेताजीलोकनिद्वारा, मुदा चोरा नुका कऽ ई काज चलितहिं अछि गाममे ।”

सबहक नजरि विक्रान्त दिश चल गेल । विक्रान्त करिआ चस्माकें ठिक कऽ रहल छलाह । बलदेव आगाँ बाजल : “परसू जखनि हमर गोली गाए मरि गेल, तऽ हमें गेलू चमराही । हमरा आओरके बापे ददाक जमानासँ गोबिनक खनदान मरी उठेनाइसँ लऽ कऽ दशमीमे आ मुड़न विआहमे ढोल बजबैत आएल अछि । मुदा ओकरा जे कहलौं मरी उठा दै ले, तऽ ऊ साफे इनकार कऽ देलक । हमे साँचेमे खिसिएलिए एकरा पर । हमें कहलिए : आइँ रौ, हमर मुइलाहा गाए जँ तों नइँ उठेबही तऽ कि हम सड़ए दिएक गोहालिएमे ?

एइपर गोबिनक भातिज कहलक : सड़ाउ वा किछुओ करू, हमरा आओरकें एइसँ मतलब ! हमरा आओरकें जतिआ बन्हन छै, मरी जे केओ छुअत, तकरा दण्ड जरीवाना हएत ।
लोकसभक ध्यान गोबिन पर गेल । ओ मुड़ी तर–उपर हिला रहल छल ।

“एकर कि मतलब ? ओ जँ मरी नइँ उठाओत तऽ तोंसभ मारबहिक ?” एकटा बूढ बाजल ।

“नइँ, तइ लेल किएक मारब ? आगाँ सूनू ने” बलदेव बाजल, “मालिक, गोहालीमे गाए मरल छल । आब कि करी, नइँ करी ? एही विचारमे छलौं कि हमर पितिऔत भाए मलहू कहलक जे अपनेसभ समाङ्ग बैलगड़ी पर लाधि कऽ धारक कातमे चलू, बलू, गाडि दिऔक ।”

“हमर सब समाङ्गक मञ्जूरी भऽ गेल । ओ गाए महज गाइएटा छलै मालिक, हमर अपने माए जकाँ छलै । गोलीए गाइके परतापेँ हमरा आओर बरदबला भेल छी ।

ओकरे जनमल दूनू बच्छासभ आब हर आ गड़ी, दूनूमे लागि गेल छल । लाधलौं सैब किओ मिलि कऽ बैलगड़ी पर आ जोतलौं ओही बच्छासभकें । धारक कातमे गेलौं । मालिक, हमर बेटा कहलक जे धारक कातमे नइँ गाड़बै एइ गाएकें । एकरा अपनासभक अपने खेतमे, अल्हुआ खेतमे बगलमे गाड़बै ।”

“मालिक, कतबो कहलिए ओसब नइँ मानलक । कहलक जे गाए हमरा आओरकें दूध पिएलक, बच्छा देलक ओ तऽ हमराआओरके माए थिक । तएँ एकरा हमसब खेतेक बगलमे अप्पन जमीनमे गाड़ब ।”

ओ आगाँ बाजल, “सएह भेल । हमसब गाएकें गाडि कऽ धारमे नहेलौं आ घर एलौं । रातिमे जखनि हमसभ खा कऽ सुतए लेल जा रहल छलौं, तखनि हमर भातिज देखलक जे गोबिन रामक भातिज रामचरन धार दिश जा रहल छल । ओकरा शङ्का लागल । ओ पुरे दिआदीकें बजा कऽ कहलक जे चल तऽ देखएले चुप्पे चाप, ई कतए जाइ छै ।”

सब गोटे गुम्म छल । कोनो नाटकक दृश्य जकाँ लागिरहल छल ।

वलदेव आगाँ बाजल, “हमसब रमचरनाक पाछू (पाछू चुप्पे (चाप जा रहल छलौं । ओ हमर अल्हुआ खेतमे गेल आ एम्हर (ओम्हर ताकि कऽ हथबत्ती बारलक । एक गोटे आओरो पुबारी दिशसँ आएल । दूनू गोटे मिलि कऽ कोदारिसँ खुनि कऽ हमर गाएक मरीकें खींचि कऽ बाहर निकाललक । तकर वाद छुरी निकालि कऽ गाएके खालनाइ शुरु कएलक । मालिक, हमरा आओरकें रहल नही गेल । दौगि कऽ गेलौं आ पकड़लौं रमचरनाक गट्टा । ई हमराआओरपर छुरासँ प्रहार कएलक तऽ साँचे हमर समाङ्गसब मारलक एकरा ।

गामक लोकसभ सभ गोटे गोबिन आ ओकर परिवारक लोक दिश ताकिरहल छल । ओसभ किछुओ बाजि नहिरहल छल ।

भुटकुन मुखिया गोबिनसँ पुछलनि : कि गोबिन ? इसभ गप सत्य थिक ?

गोबिन रामचरित दिश तकलक आ मुड़ी हिलेलक । विक्रान्त मौन छल आ चस्मा उतारि कऽ आन दिश ताकिरहल छलाह । सन्तोष रमण माइकसँ दूर जा चुकल छल ।

भुटकुन मुखिया बजलाह : देखै जाइ जाउ, जखनि मरीकें छुनाइ गलत थिक तऽ रमचरना मरी उखाड़ए लेल किएक गेल ?

विक्रान्तजी दिश ताकैत मुखियाजी बजलाह : कि यौ नेताजी ! रमचरना किएक वलदेव दासक निजी गाएक खल्ला निकालए लेल गेल ? कि ई उचित छल ?

विक्रान्तक मुड़ी नीचा मुहे झुकल छल ।

रामचरण बाजल : तऽ कि करू हमरा आओरके । माल–जालक खल्ला नही खालू तऽ कोना कऽ गुजर चलत ? ई सभटा नवका (नवका कानून लगा कऽ हमरा आओरक जीविका समाप्त भऽ गेल अछि । ओहू दिना हमरा आओरके मोन छल गाएकेँ उठाकऽ फेकि दी, मुदा दण्ड जरीवानाक डरेँ नही उठेलौँ ।

एखन धरि किछुओ नही बाजिरहल अस्सी बरख उमेरक ननकू राम ठाढ भेल आ बाजल : ई सैबटा बदमासी नवका नवका छौंड़ाआओर कऽ रहल अछि । दशमीमे ढोल बजबए छलू हमरा आओरके, तऽ दश मोन धान आ दू सए टका होइत छल । नवका नवका कपड़ा बस्तर घरमे भरले रहै छलै । जाँत–पीचसँ कोन कोनने साड़ी बिलाउज पिन्है छलै हमरा आओरकें जर जनी जाइत ?

चारू दिश शान्ति छल । केओ किछुओ बाजि नहिरहल छल ।

गोबिन सबहक दिश ताकलक आ बाजल : मालिक, आब इसभ नही चलत । बहुत भऽ गेल । हमराआओर पहिने जकाँ ढोल पिपही करब, माल महिंस खालब । पहिनही जकाँ धी पुतहुकें जाँत पीच करत हमरा आओरके लोग लोगाइत । कोनो काज केलासँ कोना केओ छोट (पैघ भऽ सकैत अछि ? जे भेल से भेल । आबसँ हमसभ एक भऽ जाइ ।

सभ गोटे हँ मे हँ मिलेलक आ अपन अपन घर गेल । विक्रान्त जीप दिश जा रहल छलाह । अञ्चिन्हार आगन्तुकलोकनि प्लास्टिकक कुर्सीसभ गेंटि कऽ जीपमे राखिरहल छल । सन्तोष रमण माइकक तार खोलिरहल छल ।


नेपाली भावानुवाद

(मैथिल समाजमा दलित जागरणको नाममा सामाजिक सद्भावलाई खल्बलाउने किसिमका कामहरू पनि भइरहेको सामाजिक अवस्थालाई यस कथाको मूल विषयवस्तु बनाइएको छ । ठुलो जनसंख्या र धेरै जातिहरुको बसोवास भएको एउटा गाउँमा एक पटक दलित जाति मध्ये एक चमार जातिको र दास बनियाँ जातिको दुई परिवार बीचमा संघर्षको वातावरणलाई साम्य पार्न पञ्चायतको आयोजना गरिएको छ । सशस्त्र संघर्षमा लागेका व्यक्तिहरुको समुपस्थितिमा हुन लागेको पञ्चायतमा दुवै पक्ष जम्मा भएका छन् ।

मुख्य आरोपी बलदेव दासका सन्तानहरुले गोविन्द रामका सन्तानहरुलाई पिटेको, घाइते बनाएको मुख्य आरोप छ । वयोबृद्ध भुटकुन मुखियाको अध्यक्षतामा आयोजित बैठकमा बलदेव दासको तर्फवाट आएको वस्तुस्थितिवाट पुरा सभा शान्त भइसकेका हुन्छन् ।

भएको के हो भने बलदेव दासले वर्षौन्देखि पालेको गाई कालगतिले मरेछ । परम्परागत रुपमा मरेको गाइवस्तु फ्याँक्ने काम स्थानीय चमार जातिका मानिसहरुले गर्दै आएको अवस्थामा दलित जागरणको अभियान अन्तर्गत सिनो फ्याँक्ने काममा प्रतिबन्ध लगाइएको कारण गोविन्द रामको परिवारले मरेका गाईवस्तु छुनु घिनलाग्दो काम भएको तर्क दिएर मृतक गाई उठाउन मानेनन् । अब अरु कुनै उपाय नहेरेर आफ्नै बैलगाडामा गाईलाई लाधेर उनीहरुले आफ्नै खेतमा सिनो गाडेछन् ।

तर त्यहीं राती गोबन्द रामका छोराहरू लुकी छिपी त्यस गाईको छाला काढ्न गए । बलदेवका सन्तानले सुइँको पाए र रंगेहात गाईलाई खाल्टोबाट निकालेर छाला काढ्दै गरेको अवस्थामा समाते । त्यसै क्रममा दुवै पक्षको झगडा भयो ।

मेरो आफ्नो आमा जस्तै गाईलाई आफ्नै हक भोगको खेतमा अन्तिम संस्कार गरे जस्तै गाडेर पुरी दिन्दा के कति कारणले गोविन्द राम पक्षले खाल्टोवाट निकालेर छाला काढ्नेको भन्ने दास पक्षको भनाईको उत्तर राम पक्षले दिन सकेन । झगडाको कारण स्पष्ट भएपछि दलित विरुद्धको उच्च वर्गको अत्याचारको रंग दिइएको मुद्दा सेलाएर गयो ।
कथाको अन्तमा चमार जातिका मानिसहरुले दलित जागरणको नाममा गरिएको यस्ता यस्ता सामाजिक सहकार्य र आम्दानीमूलक काममा प्रतिबन्ध लगाइनु उचित नभएको गुनासो व्यक्त गरियो र अन्तमा सबै जातिले पारम्परिक व्यवसाय गर्दै रहने प्रतिबद्धता व्यक्त गरे ।)

व्यक्तिगत विवरण
नाम : देवेन्द्र मिश्र
पता : साबिक गा.वि.स. वरही–वीरपुर–६, हाल : छिन्नमस्ता गाउँपालिका–१, सप्तरी (नेपाल), सम्प्रति : राजविराज–२, सप्तरी, नेपाल
जन्म तिथि : ०९–११–१९५५ ई. (वि.सं. २०१२ कातिक २३ गते)
बुवाको नाम : श्रीउदित नारायण मिश्र
आमाको नाम : श्रीमती सोना देवी मिश्र

शैक्षिक योग्यता :
(१) प्रारम्भिक शिक्षा : रा.प्रा.वि. बरही–वीरपुर, सप्तरी, वि.सं. २०२२सम्म
(२) एस.एल.सी. : पब्लिक हाइ इङ्गलिश स्कुल, लौनियां–तिलाठी, सप्तरी, वि.सं. २०२६ साल, एस.एल.सी.परीक्षा बोर्ड, नेपाल
(३)आई.ए.: त्रि.वि.वि., महेन्द्र विन्देश्वरी कलेज, राजविराज, वि.सं. २०२९ साल
(४) बी.ए.: त्रि.वि.वि., प्राइभेट, वि.सं. २०३६ साल
(५) बी.एड. (अंग्रेजी): त्रि.वि.वि., वि.सं. २०५७ साल
(६) एम.ए. (मैथिली) : त्रि.वि.वि., प्राइभेट, वि.सं. २०६३ साल

तालिम :
१. शिक्षक प्रशिक्षक (अंग्रेजी), निमा वि, मावि
२. मुख्य प्रशिक्षक, बहुभाषिक शिक्षा शिक्षक तालिम ( मैथिली)
३. केन्द्रीय प्रशिक्षक, अंग्रेजी प्रयोगात्मक परीक्षा मनीटर्स तालिम, प निका सानोठिमी
४. प्रशिक्षक, प्र अ नेतृत्व क्षमता विकास तालिम, श्रोतव्यक्ति सक्षमता अभिवृद्धि तालिम

पेशा : सेवा निवृत्त शिक्षक–प्रशिक्षक (अंग्रेजी, मैथिली), शैक्षिक तालिम केन्द्र सप्तरी
भाषा : मैथिली, अंग्रेजी, नेपाली, हिन्दी

प्रकाशित कृतिहरू :
(१) बगियाक गाछ, मैथिली बालकथा संग्रह, :साझा प्रकाशन, २०६६
(२) मैथिली सामान्य ज्ञान, प्रकाशक :मैथिली साहित्य परिषद, राजविराज, नेपाल, २०६७
(३) श्रीमद्भगवद्गीता मैथिली पद्यानुवाद, प्रकाशक : नवीना देवी मिश्र, वि.सं.२०७३
(४) हमर मैथिली मनोहर पोथी, मैथिली वाल सन्दर्भ पुस्तक, वि.सं २०७४, प्रकाशक: देवेन्द्र मिश्र

संलग्नता : (१) नेपाल सरकार, पाठ्यक्रम विकास केन्द्र, सानोठिमीवाट कक्षा ९ र १० को मैथिली पाठ्यपुस्तकको लेखक समूहमा धिरेन्द्र प्रेमर्षिसँग सहलेखन ।

फुटकर रचनाहरू :
(क) नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानको आँगन पत्रिकामा विभिन्न आलेखहरू
(ख) राजविराजवाट प्रकाशित “वाणी” पत्रिकामा मैथिलीका आलेखहरू
(ग) राजविराज “मिथिला” पत्रिकामा मैथिलीका आलेखहरू
(घ) विभिन्न स्मारिकाहरुमा लेख, निवन्ध, कथा, कविता, वाल कथा, लघुकथा, नाटक इत्यादि प्रकाशित
(ङ) नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानवाट प्रकाशित “नेपालका प्रतिनिधि कथाहरु”मा कथा प्रकाशित

प्रकाशनोन्मुख:
१. मैथिली कथा संग्रह
२. मैथिली कविता संग्रह
३. मैथिली लघुकथा संग्रह
४. मैथिली संस्मरण संग्रह
५. आधारभूत मैथिली व्याकरण
६. मैथिली वाल कथा संग्रह
७. मैथिलिक हराइत शब्द–संग्रह
८. हमर जीवन यात्रा (जीवनी)
९. Boost Your Knowledge Series-1 ( Some Important Abbreviations)

पुरस्कारहरू :
१. साझा वाल साहित्य पुरस्कार, वि.सं. २०६६
२. स्थानीय शान्ति समिति पुरस्कार, स्थानीय शान्ति समिति, सप्तरी (लघुकथातर्फ)
३. नेपाल विद्यापति मैथिली अनुवाद पुरस्कार, वि.सं.२०७४, विद्यापति पुरस्कार कोष, नेपाल सरकार
४. मिथिला भूषण सम्मान, मैथिली लोक–संस्कुति मञ्च, लहेरियासराय, भारत

सम्पर्क नम्बर : ०३१ – ५२०९३३, ९८६२८५०१५१, ९८०४७०२१५५

विशेष सहभागिता :
१. सह–सम्पादक, मिथिला साप्ताहिक
२. मैथिली पढाइ उत्प्रेरक कार्यदल
३. मैथिली साहित्य परिषद, राजविराज
४. प्रदेश पार्षद, नेपाल पत्रकार महासंघ, सप्तरी
५. आजीवन सदस्य, वृद्ध सेवा ट्रष्ट, राजविराज
६. प्रधान सम्पादक: वाणी पत्रिका, राजविराज
७. तत्कालीन सदस्य, (कार्य सम्पादनोपरान्त विघटित) संस्कृति मन्त्रालय, विद्यापति पुरस्कार ट्रष्ट विधान निर्माण कार्यदल, नेपाल, २०६७ साल
८ सदस्य, संस्कृति मन्त्रालय, नेपाल विद्यापति पुरस्कार चयन समिति, वि.सं. २०७०
रुचि मैथिली पाठ्य सामग्री पठन/लेखन

आदर्श : श्रीमद्भगवद्गीताको निष्काम कर्मयोग, सनातन श्रीरामानन्दीय वैष्णव परम्परा

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