डोलिया लक एतै (मैथिली गजल)


एक अपरिचित हृदपक समीप मोर अछि
ओकरे हाथ आब हमर जिनगिक डोर अछि

पलपल हरपल ओकरे यादमे डुबल हम
सुमिरैत सोचैत ओकरे होईत हमर भोर अछि

एकान्त लगैय पिरितगर मोनभावन आब
असगरही सही बातचीतक कहाँ तोर अछि

नहिरहितो अतापता आश अछि मिलन केर
नयन बैसल छवि देखि मुस्कैत दुनुु ठोर अछि

एकदिन लेब हमरा जरुर डोलिया लक एतै
हमर हाथक रेखा पर ओकरे नामक जोर अछि

सुधा मिश्र
जनकपुर -४
धनुषा,नेपाल

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