पाँच मुक्तक (खेलबै होरी)

  • by
SudhaMishra

१) खेलबै होरी नव नुवामे
भरिक सिनेहिया मीठ पुवामे
खेलबै होरी हम नव नुवामे
चलि आऊ प्रीतम गाम अपन
अनुराग सजोनेछी मनुवामे

२) परिक्रमा घुमैत नरनारी
कतौ किशोरीजीके डोली कतौ मिथिला विहारी
परिक्रमा घुमिरहल छथि मिथिलामे नर नारी
जनकपुर सँ शुरु जनकपुरहीमे समापन
घुमिक पँचकोशी करथिन होरीके तयारी

३) होरीमे मचतै धमाल
होरिक मिलनमे मचतै धमाल पिया
दूध मरिचक भांग करतै कमाल पिया
जखन पुवा सन गालमे लगतै रंग लाल
देखि देखि हेतैक बहुतो हलाल पिया

४) लागिजेतै मोहरक निशान
फागुमे नहिरहतैक हर्षक ठिकान गे
सिनेहियाके हेतै सिनेहीसँग मिलान गे
मोन तँ छलहे रँगल तन सेहो रँगिजेतै
लागिजेतै किनको मोहरक निशान गे

५) हिया धडफडायल छै
आयल वसन्त ऋतु धरती कलशाएल छै
बहल फगनौटीमे मोनमा फगुआएल छै
भिज जेतै तनमन पियाके घोरल रंगमे
सोचिएक अखने सँ हिया धडफडाएल छै

सुधा मिश्र
जनकपुर -४
धनुषा, नेपाल

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