LakpaSherpaSamarpit

हेना देश बडा भाग्य से इकल्लो मिलत है
तुम जहे देशमे बैठन बाले आदमी से पुछौं
माया त बडा भाग्य से ईकल्लो मिलता है
ससारमे चोखो माया लानबाले प्रेमीके पुछौं

हेना हिमाल है पहाड और तराई फिर है
सीमा मिचन बालो दुश्मन के मारन वीर है
अपन अपन चलन और रीति तिथि गजब
हेना भाग्य से इकल्लो संस्कृति मिलत है

बडोबडो नदिया और हेना बडोबडो बन है
हेना सबै मिलके बैठत कितनो अच्छो मन है
समस्या सबको समाधान मिलके करत है
संसार भर ना मिलै ऐसो हेना अपनी पन है

कोईके खान ना है कोही चढत बडो गाडी
मिठो खान अच्छो लगान जान लगे खाडी
काहे विकास और रोजगारी ना मिलत है
फिर भी हेना सबको मन खुशी से खिलत है

किसानको विकास करन सरकार अग्गु बडौ
देश अच्छो बनान ताही हेना युवा गजब पढौ
बुद्धको देश सगरमाथाको देश सबके पता है
ऐसो देश बडा भाग्यसे ईकल्लो मिलत है

(राना थारू भाषाको कविता)

कवि : लाक्पा शेर्पा समर्पित
ठेगाना : ताप्लेजुङ, हाल धनगडी कैलाली

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