~माए गै ! हमहूँ हटिया जेबै !
~से किया रे ? नइँ जो, साँझ पैड गेलै, दोसर दिन जाइहें । हे तोराल’ हम जलखै नने एबौ, फोँफी सोहो नन’ लएबौ ।
~नइँ जोऽऽ, हम जेबेऽ करबै । नाइँ, नाइँ, नाइँ….. । (काइनते काइनते)
~ मर, नै कान न’ रे । आब कि करबै ? कमलपुर बाली हमरा खातिर रूकल हेतै । ले,ले चल चुप हो, चल । पहिलैये लेट भ’ गेलै ।
~ रूक माए, हम लबका कपडा पिन्ह लै छियै । (दरबर दैते आ धडफडाइत) । माए, माए, गै अँगा कत’ राखन’ छी?(घरसँ आवाज लगाबैत)
~देखी न’, अलगनीप’ हेतै । नइँ त’ ओसराके डोरीप’ लटकल हेतै । जल्दी कर । …हँ,नकझपना लैल’ नै बिसरिहे ।
~यै बेल्हीबाली, यै,कन’ छियै ? जेबैन’ यै? साँझ पैड गेलै । ( डेढिया प’ ठाढ भ’ क’ हल्ला करैत)
बेल्हीबाली : हँ हँ जेबै, चैल एलियै । आऊ न’ अँगने, डेढियाप’ किया ठाढ छियै । देखू न’ ई छौडबा हरान करैछै, हटिया जाइल’ । (झोरा चपुतैत)
~भेलौ रे ऽऽ ? न त हमरा औरके जाइ छियौ, भने जाइत रहिहे ।
~रूक, रूक भ’ गेलै, पेन्ठ हरहर छै । डोराडोइर म’ खोंसै छियै । …ले चल ।
***
बेल्हीबाली : अहाँके की-की लैके य यै, कमलपुरबाली?
~ ए, हमरा बडे़ सामान लैके छै । काइल बाडिक टाट बान्हैबाला जनो रहतै । पचफोर्ना, तेल, हरदी, मरचाइ, जिर, पापर, अल्लु, पियाउज आ तरकारी सब लिय’ पडतै । नून कनिये छलै । नूनो लिय’ पडतै । हँ, हे ! पत्ता सेहो लिय’ पडतै । मन पाइड दिह’ हे । नइँ त’ बुढिया बढ्डे बाजतै ।
~ मर, पत्ता कि करबै यै?
~यै,टाट बान्हैबाला मुसहर जान छियै न, तएँ पत्ताप’ खाइल’ दैल’ ।
~एँ.. । आइयो काइल भेदभाव करै छियै ।
~ नइँ यै, हम नइँ करै छियै । हमर साउस, नै बुझने छियै, कते बिटन्डी छै ।
~ जोरस’ लफैडक’ चल न रै छौडबा !
~ चैलते त’ छियौ ।
~चैलते छियै । दुलैक क’ चल न,एना ज चलबिही त कखनि पुगबिही,कखनि सामान किनबै आ कखनी घर येबै ।
कमलपुरबाली : यै बेल्हीबाली, अहाँ की-की लेबै ?
~नइँ कुछो बेसी, अल्लु लेबै, सुवाबिन, पचफोर्ना आ कचका मरचाइ । भेटतै त’ माछक सुखै ल’ लेबै । धियापुता बड दिनसँ किलोल करै छै, जे सुखैके तिमन खेबै ।
(पि पिप.. पि पिप… ट्रकके सिटीके आवाज)
कमलपुरबाली : सडक कतेक सकेत भ’ गेलैय’ । जे बेसी धनिक छै सेहे सबसँ बेसी रोड घेर्ने छै । आखन त जेना लगलै टडक देहेप’ चहैड गेलै, हमरा जे डर भेल, से हँ । कहिया सुधरतै लोक आउर । ई गाडीबला आउर देहेम’ सटाक’ गाडी चलाबै छै ।
~हँ, यै कमलपुरबाली ई त’ बौवाके हम बम्मा कात राखने छलू नइँ त’ चिपाइए जाइतियै । कहैत रहियै छौडाके, नइँ जो । म’त थोडहिन सुनैछै । …
कमलपुरबाली : हमर सखीके दिएर के नये नये बियाह भेल रहै । दुनु परानी वुटबल जाइत रहै । अहिना टडकमे ठोकर लाइग ठाम्मइरही गेलै दुनुगोटे । …
~ माए गउ, हटिया रोडेप’ लगैछै, गाडीके बगलैबाला रस्तो नै छै ।
~हँ, रे बाउ, रोडेप’ लगैछै । दिक्कत त खुब हैछै । हटिया समिति सबके सोचबाक चाहि, नेता सब आ मेयरके सोचैके चाहिं ।
~ हम नमहर हेबै, मेएर बनबै तब सब ठिक कैर देवै, कि माए ।
~ हँ,ले ठिक करिहे । जकरा कर’ चाहिं से त करबे न करैछै आ …….!
बेल्हीबाली : झलफल अन्हार त भ’ गेलै, हे कमलपुरबाली जल्दी जल्दी सामान किनू आ चलू ।
कमलपुरबाली : हौ, केना छ’ अल्लु किलो?
~साइठ रुपैये किलो ।
बेल्हीबाली : बड महग कहैछ’ हौ । राजविराजम’ त पचासे टके किलो दैछै ।
~हे मुहे देखलेतौ, ५० टकेम’, हमरा आउरके बोराबन्दी ५६/५७ टके परैछै । ६० टके लेनाइ छौ त’ले नइँ त रस्ता नाप ।
कमलपुरबाली : हौ, एना किय’ बाजै छ’ हौ, नइँ देवह’ त’ कह’ न नइँ देवै, ई कोन बात भेलै रस्ता नाप ! बाजैके तमिज नै छ’ ।
चलू यै बेल्हीबाली, एकराम’ नै लेबै । दोकान कोनो कमी छै ।
~ हँ चलू, दोसरे जगह किनबै, अहुस’ महग देतै न, तैयो दोसरे जगह किन लेबै, मगर एकराम’ नै किनबै । …
कमलपुरबाली : यै भेल,चलू हमरा भ’ गेलै सामान किनल ।
बेल्हीबाली : हँ, चलू ।
~ माए गे माए, हमरा बेल्ट किन दे न !
~बेल्ट ? बौवा, आइ नइँ किन, पैसा नइँ छै । ऐगला दशमीके मेलाम’ किन देवौ ।
~नइँ हमरा किन्दे, किन्दे… नइँ हम जो, किन्दे ।
~ (डेन पकैडक’ तानैत) तूँ एत’ आइब क’ नखरा करै छिही छौडबा । चल जलखै किन दैछियौ । फोँफी,चप सेहो किन देवौ । झिल्ली लेबही ।
~नइँ,हमरा कुछो नइँ चाहि । नइँ हमरा किन्दे .. किन्दे.. किन्दे ।
~चल न घर, रै बाउ, राइत पैड गेलै ।
~नइँ हम नै जेबै, जाब’ धरि बेल्ट नै किन्देवही ।
~आब हम कि करबै, ई छौँडा बेजतिया छै ।
कमलपुर बाली : यै बेल्हीबाली, किन्दीयौ न’ । बच्चा कतेक किलोल करै य । हे जल्दी करू । हमर मालजाल सब बहारेम’ हेतै । कोही धुइँया धुक्कुर नै केने हेतै । गए मालके मच्छड काइटक’ लहु लुहान केने हेतै । वर्तन भाडा माज’ पडतै आ चुल्हा सेहो निप’ पडतै । आइ त साउस हमर खा जेतै हमरा ।
~ हँ, देखैछियै न ई छौँडाके, केना केना करै छै यै । कमलपुरबाली कि कहू ! पैसा नै छै । न त किन दैतियै न !
~(मुह टेंढ क’ क’)हूँ, तोहर खुटम’ बान्हल छौ नइँ ?
( डाँडसँ खुँट निकाइलक’ खोलैत) रौ, दसे टका छै, हेतौ त’ले ले.. ।
~ पैसा हम दैछी, हमरा घर प’ द’ देव । हे बौवाके किन दियौ बेल्ट ।
(बेल्ट सब दिस इसारा करैत) माए गै ई ललका बेल्ट लेबै ।
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#श्यामपृत मण्डल
राजगढ, सप्तरी
२०७७ कातिक २३
