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विविध भाषाका रचना

20150802_BinitThakur_poem

गाम–नगर में

गाम–नगर में सोरसराबा सुनल गेल बड़ बेसी ।
लोकतन्त्र में अपन अधिकार लऽकऽ रहत मधेशी ।।
जनसंख्या सँ जनसागर में जोरल छलौं हम सीधा ।
खाकऽ हमहुं लाठी गोली पारकेलौं सबटा बाधा ।।

बटवृक्षक अंकुर बनि जनमल कतेको आशा ।
लतरल चतरल मधेस मे हेतै नै कतौ निराशा ।।
जाइत पाइत में नै ओझराकऽ चुनब असली नेता ।
विकास में लिखत नव ईतिहास मधेसक बेटा ।।

तामाङ सेङ्राप्ला फिरि स्हेङ्बा स्ह्यो स्ह्यो

सेङराप् विधा ग्योईकाईला लोकप्रिय विधा हिन्ना । चु काल्पनिक तबा मुला । हाजिबै पात्र अथवा घटनाला कलात्मक वर्णनुन् सेङराप् हिन्ना पङ्बा खाम्ला । वास्तवरि सेङराप्ता ग्योईकाईला रिला रुपरि किन्वाला अवस्था मुला । सेङ्बाला हिसाबसे सेङराप् मुलत: सेम्राप् तेन ग्रेनराप् लसि बो नि रि थान्खाम्ला तसैनुन् व्हाई सेम्राप्तान् (गितिकथा) सेङराप् विधा नाङ्रिन् थान्बाला याङ्बा मुला । तामाङ ग्योइकाइरि सेङराप् विधासे राङ्ला स्यान ख्ला सोबला याङ्बा मुला । तामाङ ग्योइरि हाजिबाइ पात्र, घटना, परिवेशफिरि कथितिसि व्रिबा लेखतान् सेङराप् पङ्बा मुला ।

20150718_BinitThakur_poem

जे करथि घोटाला

जे करथि घोटाला छथि अखन बोलबाला
चलत कोना ई दुनिया कह रे उपरबाला

गाम–नगर में बैइमान वनमे घुमै सैतान
मानब भऽ दानब वनि करै सज्जनक अपमान
आब सज्जनक बस्ती सब बनिगेल बधशाला

20150702_BinitThakur_poem

कम्प्यूटरक दुनिया (मैथिली कविता)

ईन्टरनेट, ईमेल कम्प्यूटर के दुनिया ।
च्याटीङ्ग पर भेटल हमर ललमुनिया ।।
नाम ओकर भाई जेहने छै अलका ।
तेहने ललितगर केश ओकर ललका ।।

च्याटीङ्गसँ शुरुभेल नीक प्रेम कहानी ।
वेभलेन्सक सामने लागे रुपक रानी ।।
हलका लिपिष्टिक गोल गोल मुखड़ा ।
लागे ओ जेना हँसैत चानक टुकड़ा ।।

शान्ति सन्देश

ए ! शान्तिदूत परवा उड़िकऽ आ अप्पन देशमे
फैलऽवै तों शान्ति हिमाल, पहाड़ आ मधेशमे
एतऽकेँ सभ नर–नारी अछि शान्तिकेँ पूजारी
सहत कोना हिंशा पसरल अछि समस्या भारी

हिमालक अमृत जलमे मिलिगेल शोनितकेँ धारा
भेल अछि अखन शसंकित जनता नेपाली सारा
परवा छे तों सहासी पृय सभक मोनक विश्वासी
कर तोँ कोनो उपाय रहे नहि किओ बनवासी

20150609_BinitThakur_Poem

बेटीक भाग्य विधान

बीसम बसन्त जाहि घर बीतल सेहो घर भेल आब आन
किया विधना फेरि(फेरि कऽ लिखे बेटीक भाग्य विधान

के आब भोरक भुरुकबामे उठि कऽ चुनत बागक फूल
एतबो नै कोना सोचलन्हि बाबा कोना पठाबथि दोसर कूल
के बाबा संग पूजालग बैसतै के देतै अरिपन दलान

ङादै एलान् मिसी च्याबा (तामाङ गजल)

ङादै एलान् मिसी च्याबा, सेम खाजी बोईमा।
एलान् लिरि छ्यामनुन् नेबा, सेम ताजी बोईमा।

ङाला धिम, आबा, आम्दा, ज्यानलाला बिसाम्;
एथेन् धिमनाम् सोबारी, ङाम् राजी बोईमा।

जोरीबैरीला ओन्साङ्ऱि, जा गिला आम्से;
जन्ति लासी होन्बारी, रहर लाजि बोईमा।

पिन्ला एदा सोदेदोना, चु डेन्बा मायाँ;
तिल्दा तोजी आईन् वा थे, म्हारम्हुई पाजी बोईमा।

म्हेन्दो

मिख्लिसे ग्यालाम् पाङ्ला, आक्रागो ह्या म्हेन्दो।
ए ङाला सेम्तीङ् टाङ्ला, आक्रागो ह्या म्हेन्दो।

खाई पिन्ला मायाँ एदा, थेसे ङासे जति;
घाईमा तोला घाईमा बाङ्ला, आक्रागो ह्या म्हेन्दो।

घ्यामरी म्हेन्दो ठाम्आखाम्सै, पुजु ल्हेसी पिन्ला;
चुराङ्बान् टिम् भाग्या ह्याङ्ला, आक्रागो ह्या म्हेन्दो।

घाईमागी माङ्ररी खामा, डान्बा खाला सेम्दा;
एसे क्रामा थेसे म्राङ्ला, आक्रागो ह्या म्हेन्दो।

ख्रेन्बा न्हासी, फ्युबा न्हासी, ङा सोदेदोना;
जतन लाला मायाँ राङ्ला, आक्रागो ह्या म्हेन्दो।

20150421_BinitThakur_Poem

चहुँदिश अमङ्गल

स्वार्थेबस मानव उजारलक ओ जङ्गल ।
तैं धरती पर देखल चहुँदिश अमङ्गल ।।
ठण्ढी में कनकनी गर्मी में अधिक गर्मी ।
नदी नाला के आब बन्द भऽ गेल सर्बी ।।

बिन मौसम मे वर्षा कतहुं खसे ठनका ।
भेल पाथरे सँ घायल जीवजन्तु उपरका ।।
खेत भेल बालुबुर्ज कम किसानक उबजनी ।
खर्चा भेल रुपैया अछि आम्दानी अठन्नी ।।

20150401_BinitThakur_poem

भरल नोर में

केहन सपना हम मीता देखलौँ भोर में ।
माय मिथिला जगाबथि भरल नोर में ।।
कहथि रने वने घुमी अपन अधिकार लेल ।
छैं तूँ सुतल छुब्ध छी तोहर बिचार लेल ।।

20150327_BinitThakur_poem

कोरो आ पाढि

गरीब छोरि कऽ के बुझतै गरीबीके मारि ।
ओ तऽ पेटे लेल जरबै छै कोरो आ पाढि़ ।।
भेल छै स्वार्थी सब नेता अपने स्वार्थे में चूर ।
छिनलकै जे सपना सुख भऽ गेलैक कोसो दूर ।।

ओकरे पर सब मुंहगरहा करैछै ब्रह्म लूट ।
निकालै छै ओकरेसँ फाइदा करा कऽ फूट ।।
रहितै जे ओकरो लग अपन ज्ञानक बखारी ।
नै बनितै समाजक लेल दरिद्र ओ भिखारी ।।

गल्ती लजिम

सेम न्हाङरी थन्छी एद ङै गल्ती लजिम
जुग्दोनल अहिन माया २दिन्द तजिम।

सिसै सोसै छ्याम ए ङ सुख दु:ख गन्सल बिम्ब
डोरेप लजि दोबाटो दोना शोक ख्लासी ए ब्राजिम।

ह्वाईखा (तामाङ कविता)

प्लेक प्लेक तासाई,
फोदोक फोदोक भोल्बान्मुला ।
प्लीङ लासी ब्राई ब्रुई लाबार,
थे म्लाङ म्लाङ्बा युङ्बादुगु ।
तागे लाजी काप्काप्
नाङ्मा नाङ्मा,
म्हागे लाजी मुबा साः
पाख्लेख् ताजी मुबा पोङ,

तःधंम्ह मनू ……

तर……..
पासाया ल्हाः थर्रर खात भुसुभुसु चःति वल । तुति याग्लाप्याग्ला वन । म्ह छम्हं मू हाल । वं म्हगसय् तकं मखंगु खँ वल । व किंकर्तब्यबिमूढ जुल । गन खः अन हे थिंग दंगु दनांतुं जुल ।
“पासा झीगु अनन्त यात्राया थ्व न्हापांगु पलाः खः , न्हापांगु यात्राया शुरुवात हे …” जिगु खँ पुवने मलावं हे – तर, थ्व जि पाखें जुइमखु – वं थःगु क्वःछिना कन –जुइ मखु जुइ मखु जुइहे मखु । थुलि धयाः व थुकथं च्वन – यत्थे सिइ दु व थःगु निर्णयं देग लिचिली मखुत ।

तमाङ ल कोला

जता हिन्छै दुखरी बोल्बा तमाङ ल कोला
ङेब ताङ्बा लबरी साथ आरे ह्रोला।

ब्यान्ब डुईब अल अथुर म्हिल बोला
जत्ती मुल जे मुल थेन चल ब्रल कोला।

सेम अरेब अहिन म्हिह्राङ कोर्ब ब्रबरी
दोहोरि थेन डिस्को निसी स्याबरी।

देब घिसि

लिम्बूजातिमा ढुंगा कानुन

अहिले न्यायका लागि मिलापत्र बनाउनेदेखि अदालत
जानेसम्म चलन छ। उहिले भने
कचहरी बसी ढुंगा
गाडेर न्याय दिलाउने गरिन्थ्यो। आदिम सभ्यताको न्यायिक
कार्यमा ढुंगाको उपस्थिति लिम्बू जातिमा आजसम्म
पनि भेट्ने गरिन्छ।
कुनै व्यक्ति, परिवार, जाति, समुदाय,
सम्प्रदायको जीवनमा उनी
हरूको परम्पराले गहिरो प्रभाव
पारेको हुन्छ।
उनीहरूको परम्परागत विश्वासले
समाज बाँध्न रीतिरिवाज निर्माण
गरेको हुन्छ। हिजोको सामाजिक
विकासमा कसले के गर्दा हुने, कसले के
गर्दा नहुने जस्ता सामाजिक व्यवहार
रीतिरिवाजमा भेटिन्छन्। जब
रीतिरिवाजलाई समाज विकासले संक्रमण
गर्छ अनि त्यस्ता रीतिरिवाजलाई