नववर्ष मङ्गलमय होखो


सर्वत्र नेपालमे नववर्ष मङ्गलमय पर्वके रूपमे मनावेके प्रचलन रहल बा । नववर्षके दिन सबेरे नहाधोवाके आपन इष्टदेव, देवीके पूजा आराधना करके दोस्तलोगसे शुभकामना आदानप्रदान तथा मान्यजनलोगसे आशीष लेके मीठ खाना खाके आराम करके मनावलजाला । कोही कोही साथीभाइलोग मिलके वनभोज करके भा कवनो दर्शनीय ठावके भ्रमण करके भि नववर्ष मनावल करेला । नववर्षके दिन सरकारी छुट्टी होला ओहिसे नववर्ष निमने तरिकासे मनावल जाला । नववर्षके उपलक्ष्यमे तराईके जिल्लनमे कहि कहि मेला आ महावीरी झण्डा भि लागेला । कुस्ती, दङ्गल आ भेडाके लडाइ कराके भि नववर्षके दिन मनोरञ्जन कइलगइल मिलेला ।

तराईमे विक्रमीय नववर्षके दिन सतुआन होला । सतुआन के मतलब नवान्न रबी बाली जइसे चना, केराउ, मसुरी, खेसारी आ जौके दानाके माटीके कराहीमे भुज पिसके सतुवा तयार करके पहिले ग्रामदेवता, कुलदेवता तथा इष्टदेवताके भोग लगाके अपने खाएके विधि विशेष ह । वास्तवमे सतुआनके दिन नवान्न रबी बाली भक्षण कइलजाला । नववर्ष के दिन आमके टिकोराके चटनी भि खाएके चलन बा । इ दिनसे आदमीलोग तृषित÷प्यासालोगके विशेषरूपमे पानी पीयावल करेला । वैशाख महिनामे पानीसे भरल घैला दान कइलासे आपन तथा पितृ आत्माके तृप्ति होला कहल जनविश्वास भि बा । नववर्षके मङ्गलमय समयमे सम्पूर्ण नेपाली तथा गैर नेपाली जनमानसके कल्याण, सुख, समृद्धि, आरोग्य तथा सतत् प्रगतिके शुभकामनाके साथे नववर्ष २०७० सभिखातिर मङ्गलमय होखो ।

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