सालमे खाली एके बेर फुलावे वाला फुल


शिर्षक देखके रउवा लोग के जरुर आश्चर्य लागल होई बाकि बात एकदम सोह्आना सहि बा आ उहो इ होला तराईमे । पूर्वपश्चिम राजमार्गखण्डअन्तर्गत सिरहा जिल्ला के पडरिया चौकसे दक्षिणमे रहल ऐतिहासिक तथा प्राचीन फूलबारिमे अइसने फूल देखेके मिलेला । सलहेस फूलबारीके नामसे प्रसिद्घ रहल ई ऐतिहासिक फूलबारिमे प्रत्येक नयाँवर्षके दिन इहवा रहल हारमके गाछीमे सुनाखरी आकारके फूल फुलाला आ साँझतक मुरझा जाला ।

फूलबारीके मध्य भागमे रहल राजा सलहेसके गहबर (मन्दिर) से सटल ई गाछी मे सालके एक दिन भोरवेमे फूल फुलाएके आ साँझतक मुरझा जाएके बात आजतक रहस्य हि रहल बा ।

माला के आकारमे उजर फूलके झोपा जइसन दिखाइ देवेवाला ई फुल साझके मुरझा जाएला ई बात खोजकर्तालोग खातिर अनौठा आ रोचक विषय होगइल बा । ई गाछी कथिके ह, कईसे एतना दिनसे बाचत आरहल बा, वनस्पति विद्वान लोग खातिर खोजके विषय बनल बा । राजा सलहेस के रहे, केतरे एगो दुसाद (दलित) जातके आदमी राजा भइल आ सालमे खाति एके बेर फुलाए वाला फूलके बारेमे भि एगो रोचक आ सत्य घटना बा ।

छठवां, सतवां शताब्दीके समय मे मिथिला भूमिके गढ महिसोथा कहल जगहमे रहे । उ जगह अभि सिरहा नगरपालिका अन्तर्गत परेला । ओहि समय मे उहवा के सामन्त जमिन्दार भैरवभूपाल सोनम आ मन्दादेरीके कोखीसे एगो स्वस्थ वीर बालक जयवर्धन (सलहेस) के जन्म भइल रहे ।ननिहेचुकि से सौर्यवान् प्रखर बुद्धिके धनीक आ शक्तिशाली रहे सलहेस ।

सलहेसके समय कृषि आ पशुपालनके प्रारम्भिक युग रहे । ओहि समय उत्तरमे किरात प्रदेश, तिब्बत आ भुटान ओरी से आर्यवर्तमे खेत खरिहान, जनावरन लुटके लेजाएला बारम्बार आक्रमण होत रहे । बारम्बार होखे वाला भोट आ किरातनके आक्रमणके रोकेला सलहेसके बाबु भोपाल सोमनदेव गरेगना गढ (अभिके लहान बजारसे चार किलोमटिर उत्तर तरफ) राजा हिनुपति शम्सेर भण्डारीके मदत करेला गइलन । भोट आ किरातीयनसे भइल युद्धमे भूपाल सोमनदेवके सहादत प्राप्त भइला के बाद जेठ बेटाके हैसियतसे सलहेस महिसोथा गढके गणपति बनलन । सलहेस गणपति बनला के बाद कोसीसे पश्चिम गण्डकीतक अन्तर हिमालयके पद्म प्रदेश आ दक्षिण गङ्गातक आपन सैन्य संगठनके सुदृढ बनवले रहे । पकडिया गढके राजकुमारी चन्द्रावतिके नौलखा हार चोरी प्रकरणमे पकडाइल मालिनि नाम के एगो सुन्दरीसे से पुछताछ आ कारवाहि प्रकरणमे सलहेस द्धारा मालिनि के कईल सहयोग धिरेधिरे प्रेममे परिवर्तीत भईल आ दुनुके बीच प्रेम भइल कहके किम्बदन्ती चलत आरहल बा । राजा सलहेस दलितन मे दुसाद जातिके भइलाके कारण आजु भि जहाँजहाँ दुसाद जातिके आदमीयन बा उहाउहा सलहेसके गहबर बनाके देवताके रुपमे सलहेसके पूजा करेके परम्परा रहल छ ।

लहान नगरपालिकासे चार किलोमिटर पश्चिमदक्षिणमे १२ बीघा क्षेत्रफलमे फैलल धार्मिक फूलबारीमे रहल हारमके गाछीमे वैशाख १ गतेके दिन हि खाली सुनाखरी फूलमाला देखा परेला आ जेतने दिन बितत जाला ओतने उ फुल धिरे धिरे मुरझाइत जाला । ई दिन ई फुल देखेला नेपाल, भारतके असङ्ख्य आदमीके आवेला आ मेला लागेला । किम्बदन्ती अनुसार प्रत्येकवर्ष वैशाख महिना के पहिलका दिन मालिनी राजा सलहेसके प्रतिक्षामे फूलमाला लेके गाछी प्रकट होखेले । कहलजाला, सच्चा मनसे जे भाकल करेला ओकर मनोकामना पूरा होला । मेलाके दिन दर्जनो युवायुवतीके जोडी आके ऊ फूलके साक्षी मानके प्रेम विवाह करेलसन ।

राजा सलहेसके कथाके बचावे खातिर अभियो गावँगावँमे गीत आ महराई मार्फत सलहेस कथा गावेवाला परम्परा जीन्दे बा । आपन समयमे पराक्रमके बलसे नागरिकके सुशासनके प्रत्याभूति करावे वाला लोक देवता सलहेसके जीवन कथासे जुडल धार्मिक आ ऐतिहासिक जगह सलहेस फूलबारी, मानिकदह, पकडियागढ आदिके विकासमे सरकार आ स्थानिय सभिके सकारात्मक योगदान बहुत जरुरी बा जेसे स्वदेशी तथा विदेशी पर्यटकके आकर्षित कइल जासकेला आ ग्रामीण अर्थतन्त्रके विकास भि होई ।

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