विगत एक दशकसे नादिखल डुलडुल घोडाके नाच माघ २६ गते सिम्रौनगढ मे देखेके मिलल । इ नाच शहर बजारमे त लोप होइये गइल बा बाकि गाव–गाव मेभि डुलडुल घोडाके नाच दिखल छुट गइलरहे । कुछ दिनसे सिम्रौनगढ क्षेत्रमे पुनः इ नाच दिखे लागल बा जेसे ई क्षेत्रके गावनमे डुलडुल घोडा नचावल शुरू भइलासे गावके लइकनमे खुशीयाली भइल बा ।

विशेषतः धानबालीके कटाइके समय कुवारसे माघतक डुलडुल घोडा नचाके धान मागेके चलन बा । बा“ससे निर्मीत अइसन डुलडुल घोडाके रड्डीबिरड्डी कागजसे दुलहीन जइसन सजावल रहेला । इच्छुक अभिभावक आपन लइकालइकिके इ घोडापर चढाके नचवावेला । नाच देखके खुशी भइल लइकनके अभिभावकलोग नचावेवालाके अन्नके साथे रकम भि देवेला ।

डुलडुल घोडा नचावेवाला व्यक्तिकेसंगे एगो सहयोगी भि होला, जे डमरु भा ढोलक बजाके साथ देवेला । डुलडुल घोडा नचावेवाला व्यक्तिके लगे एक विशेष प्रकारके चाबुक भि होला, जउन चाबुक जमीनपर पटकलासे बडका आवाज आवेला । डुलडुल घोडा नचावेवाला पेशा भाट जातिकेलोग करत आरहल बा । इलोग इ पेशाके परम्परागत रूपमे अपनावत आइल बा ।

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