कमजोरी समाजक आओर शैक्षिक जगतके !
प्रिय चेली,
सन् २०१२ क मार्च ८ काल्हि मात्रे छल आ सेहो काहिल्ये खतम भेल । पैघपैघ नेतानेतृ आ नीति निर्मातासभ भव्य मञ्चपर भव्य बातचितसभ केलाह । ओ बातचितसभ आलिसान महलक मखमली विस्तरापर बैसक कयल गेल छल । ओ हुनकेसभक लेल छल । तोरा आ हमरसभक लेल नहि छल । ओ अहङ्कारीसभक ललिपप चटाबैबाला गप्प छल । छल, ओसभ एके बेर उठाक छतसँ जमिनपर खसाबैबला बात ।

“क” पात्रको साहित्यकार बनेर नाम कमाउने ठूलो अभिलाषा हुन्छ । शहरको सम्पन्नशाली तर प्रतिष्ठित हुन संघर्षरत पात्र । दुई-चार शब्द कोरिहाल्ने तर न त्यसमा रङ्ग हुन्थ्यो न ढ्ङ्ग । रस र बिम्ब कुन चरीको नाउँ हो पत्तै छैन ।
प्राथना गर्छौ दुई हात जोडी ज्ञानकी खानीलाई
एउटालाई पाएँ एउटा मन पराएँ
भ्रष्ट्र नेता चर्को मूल्य भाँच्छन् यिन्ले ढाड अब
कुभिन्डो
नबोलाऊ कसैलाई यहाँ राति राति
सधैं आउँछे मलाई भेट्न राति राति
पोखौँ त कसरी पोखौँ