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जोवान संग जोवान साट्छेऊ की ठुली
अनमोल रात एक्लै काट्छेऊ की ठुली

प्रहर प्रहर का अनमोल छेनरहरूमा
केराको पात सरी थाक्छेऊ की ठुली

चंचल नारीमा चच्छु हराउने त्यों
मन्द मुस्कान सधे बाद्छेऊ की ठुली

हिरा मोती सरी सुन्दरताको त्यों
वजन हुदानी खुब ढक्छेऊ की ठुली

शान दार पवन विचको हेराई भित्त्रै
शंकै लाक्छ है तिमीले डाटछेउ की ठुली

मनोज काफ्ले “मनसुन’
एलादी ४ स्यांग्जा नेपाल
हाल: कुवैत
mansun2036@yahoo.com

2 thoughts on “ठुली”

  1. प्रहर प्रहर का अनमोल
    प्रहर प्रहर का अनमोल छेनरहरूमा
    केराको पात सरी थाक्छेऊ की ठुली
    kya gajab lekhnu bho manoj ji
    अनमोल रात एक्लै काट्छेऊ की ठुली
    yesma chahi EKLAI ko thauma SANGAI ramro hunthiyo ki?
    SUNIL SANGAM

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