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भक्तिका कुरा गरी (छोटो कविता)

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भक्तिका कुरा गरी
देश भजाई खाऊ
मुक्ति कुरा गरी
शेश रजाई खाऊ
क्रान्तिका कुरा गरी
जनता कजाई खाऊ
सुशासनको कुरो गरी
दाम बजाई खाऊ
भट्टी भट्टी चाहार्नेहरू
वाइन सजाई खाऊ
झाडा पखाला लाग्ला है
ढुकुटी दरो पचाई खाऊ ।

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