तँ धन्य छस् लौ बाबु जागेर उठ
तँ धन्य छस् लौ बाबु लागेर उठ ।।१।।
जे गर्छस् साथ छ मेरो सदैव लौ
तँ धन्य छस् लौ बाबु तातेर उठ ।।२।।
जे गर धन्य होस् सदैव मेरो मन
तँ धन्य छस् लौ बाबु आँटेर उठ ।।३।।
छर्दै जा चेतना ल’गा तन मन सबै
तँ धन्य छस् लौ बाबु जोडेर उठ ।।४।।
