
नवरात्रि शुरु भऽ गेल अछि आ हमर लाल काकी दु दिन पहिने सँ घर आँगन नीप कऽ पूजा पाठ के सब ओरियान कऽ लेने छथि ।
प्रत्येक वर्ष नवरात्रि में माँ भगवती के आराधना करैत छथि, नौ दिन धरि व्रत उपवास राखि दुर्गा के नव रुप के पूजा बहुत ही विधि-विधान सँ करैत छथि । माता के भोर साँझ भजन गाबि कऽ पुकारैत छथि हे माता हमरा घर आऊ । आ नवमी के दिन कन्या पूजन करैछथि । हुनकर छोटकी पुतोह गर्भवती छली ।
लाल काकी के पोता चाहैत छल हुनका नजरि में बेटी कोनो सन्तान होई छई ओ त दोसर घर चलि जाइत अछि वंश त बेब सँ बढैत अछि । हुनका कहीं कऽ जँच करौलनि मालुम भेलानि जे कन्या आबय वाली छथि हुनकर रंग उडि गेलनि नवरात्रि सँ दु महिना पहिले के ई बात अछि । ओ अपन पुतोह के पेट मे पलिरहल कन्या के भ्रुण हत्या करब देलनि ।
आई नवरात्रि के अन्तिम दिन महामनवमी अछि आ आई ओ कन्यापूजन करै छथी बहुत पुण्य होइ छई कुमारी कन्या के पूजन सँ भोरे भोरे सँ बडबडाइत छथी कन्या के पूजा कऽ हुनका नबका कपडा आ दान दक्षिणा देलासँ भगवति बड प्रसन्न होइ छथिन साक्षात भगवती स्वरुप होई छथी कन्या आ चुल्हा पर तस्मय चढा कऽ आस पडोस मे कन्या सक के ताक चलि गेली कन्या पूजन लेल ।
मैया अबियौं हमरा अंगना
कल जोडने ठारछी ना
मे गीत कऽ आवाज अबिरहला
यी केहल कन्या पूजन अछि ।
–करुणा झा
