नेपालमे भोजपुरी भाषा साहित्य के विकाश


प्राचिनकाल से भारत बिहार, के भोजपुर, आरा, बलिया, छपरा, सिवान, गोपालगंज आ उतर प्रदेशके जनपद जिलाके भाजपुरी भााषा, नेपार९भारत के नारहके अब अन्तरराष्ट्रिय भोजपुरी भाषा होगइल बाटे । वर्तमान मे नेपाल, भारत, मौरीसस, फिजी द्दिप समुह, ट्रिनीडाड, सुरिनाम, गुआना, मलेशिया लगायत अउरी देश मे भि बोलचाल के रुपमे प्रचलीत होगइल बाटे ।

अमेरीका के हार्ड९वर्ड युनिभारसिटी कालेज मे भोजपुरी भाषा सिखावे के व्यवस्था कइलगइल बाटे ।भोजपुरी भाषा आ संस्कृतिके बारेमे सयकडो किताब अंग्रेजी भाषामे वेलायतमे बहुत पहिले जब ब्रिठिस शासक भारत मे साशन करत रहे ओही कालमे छपल किताब के प्रेरणा से आज अंग्रेज लोग भोजपुरी भाषा साहित्य कला के खोज के प्रति रुची राखेला ।

भारतके बिहार आ उतर प्रदेश के जनपद आ नेपाल के मध्य तराइ मे भोजपुरी भाषा मातृ भाषाके रुपमे विकसित बाटे, बाकिर रोजी रोटी के तालाश मे एहठावे के लोग देश विदेश के कोना कोना मे रह बसके भोजपुरी भाषाके बोल चालके माध्यम से बाण्के पानी लेखा सगरो जन जन के खुबे भीजनले बा इ सत्य ह ।

आज भारतीय भा नेपाली सिनेमामे भोजपुरी भाषा, हिन्दी आ नेपाली भाषा के एेह क्षेत्रमे पति मिला देले बाटे सर्वविदित बाटे । नेपाल मे भोजपुरी भाषा प्राचिन काल से ही मधेश तराइ मे बोलल जाला । पूर्व मेची से पच्छिम महाकाली तक के क्षेत्र के भीतर भौगोलीक आधार पर तिन भागमे बाटल गइल बाटे ।

१. पुरब भाग मे मैथीली भाषा ।
२. पच्छिम भाग मे अवधी भाषा ।
३. बिच मध्य तराइ मे मातृ भाषा भोजपुरी के क्षेत्र ह ।

परिचय:

नारायणी अञ्चल आ लुम्बिनी अञ्चल इ दुगो अञ्चल के सातगो जिला मे गइसे रौटहट, बारा, पर्सा, चितवन, नवलपरासी, रुपनदेही आ कपिलवस्तु मे भोजपुरी भाषा बोलल जाला बाकिर भोजपुरीया मनइ देश के हरेक कोना मे रोजी रोटी ला बसल रहल बोडे ओह जगहाके शहर बजार मे भोजपुरी भोजपुरीया के बोलचाल के भाषा ह । पर्सा जिला के सदरमुकाम वीसगंज नगर भइला से इतिहास गवाह बाटे पिढी दर पिढी से भोजपुरीया भाषी लोग आ आपन क्षेत्रमे रहल बसल बा सगरोगकार भोजपुरीए मे होला बाकिर शिक्षा आ शिक्षित व्यक्तित्व के कमी से येह भाषाके प्रकाशन पुस्तक के अभाव मे आगे बढे नासकल बा ।

अन्नतस् राणा शासन काल वि.सं. २००७ साल के पहिले समाप्ती आ ओकर वाद भोजपुरी भाषाके साहित्यिक जगत मे भोर भइल बा एहलेल वि.स. २००९ मे यह वीरगंजमे स्व। रघुविर राम जी महावीर राम जी कलवार के उदारतासे हाइएस्कुल अचा कांलेज केस्थापना भइल, शिक्षा जगत मे एहीजा से भोजपुरी भाषा साहित्य के उदय मानल जाइ । एह कांलेज के प्रधायपक श्री रामदेव अलमस्त जी हिन्दी भाषाके प्राध्यापक रहनी बाकिर ठेठ भाजपुरी भाषी भइएला से कालेज मे कवि सम्मेलन के आयोजन भइएल रहे ओह कवि सम्मेलन मे भाजपुरी कविता के प्रवचन से सभे भोजपुरीया भाषी के हृदय गद गद करके भाजपुरी के आगे बढावेला प्रेरित कइनी ।वीरगंज बजार मे राजा महाराजा लोग के सवारी के बखत मे मनोरंजन ला खेल तमासा के साथे साथ सांस्कृतिक कला के भी आयोजना कइल जात रहे ।

वीरगज के टुडीखेल कहलाएवाला शाही शैनिक के ब्यारक के चउर मे आयोजना होत रहे बाकिर सरस्वती पुजा बसन्तपञ्चमी के दिने होइ स्कूल आ कालेजमे रंग मञ्च कर्ताद्धारा नाटक, कविता बाचन, कवि सम्मेलन ढेर थोर बराबर होत रहे । ओह समय मे हाइ स्कूल मे मुख्य रुपमे हिन्द भाषा, भारतीय रुपैया के चलन चल्ती के सामने नेपाली भाषा नेपाली रुपैया एेशिक विषय लेखा प्रचलन मे रहे लेखक स्वयम वि.सं. २०१७ साल तक एह अवस्था से गुजरत बाडे वि।सं। २०१८ से ठीक एकर विपरीत होगइल हिन्दी एच्छिक हो गइल बांकी सब नेपाली मे । हमरा खुबे इआद बाटे एन। पी। गुप्ता पुस्तकालय आपन नामसे स्थापित करके आपन सहपाठी लोगन के साथे संधे भोजपुरी भाषामे कविता, कथा के लेखन सुरो कइनीजा बाकिर दुस्ख एह बात के बाटे कि विधार्थी जीवन अधययन अध्यापन के समयमे कुछो भि धरोहर ना रखे सकनी । नेपाल सरकारसे नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानके खातिर २०३० सालमे नेपाली शव्द कोषके भोजपुरी भाषामे उलथा कके प्रकासीत भइल बाटे । ओकरा बादमे आउरी कथी भोजपुरी भाषामे प्रकासीत भइल आ ना भइल नेपाल पैज्ञाप्रतिष्ठानके गर्भके बात नइखे ।

मातृ भाषा भोजपुरी के दुरगती भइल देखके उहसब के ध्यान मे राखके वि.स. २०२९ साल कुआर महिना मे पर्सा जिलाके वीरगंज नगरी मे जेपाली भोजपुरी साहित्य परिषद के नाम मे भोजपुरी माइ के उत्थान आ विकास ला इ संस्था स्थापित भइल । आ देगो छोटहन लेख-कविता के संग्रह पैकाशन भइल बा समाद आ सनेस पं. दिपनारायण मिश्र, राजेन्द्र प्रसाद, रामचन्द्र गुप्ता धन्यवाद के पात्र बानी । वि.सं. २०३७ साल मे लेखक (प्रकाशक) विजय पकाश बीन द्वारा नेपाल के भोजपुरी भाषामे समाचार पत्र हप्ता-हप्ता होटल-लौज मे रहके सुचना तथा संचार पंत्रालय के चकर काटत काठत कयजोर जुता खिआगएल । बाकिर हौसला बुलन्द रहे प्रयास जारी रहल ओहघरी भोजपुरी भाषा भारत के हवे ईजाजत ना मिली कहके मंत्रालय अडान लेले रहे ।

हमनी के लडाइ जारी रहल अन्तमे वि.स. २०३९ मे भोजपुरी के उदय भइल नेपाल सरकार से सगुन भोजपुरी माक्षिक समाचार पत्र प्रकाशित करेके इजाजत मिलीए जइल बाकिर स्थानीय प्रशासन द्वारा कइ एकगो व्यवधान खडा भइल, नारायणी अञ्चलाधिश कार्यालय मे दैनिक हाजीरी देवेके परल ।

६० (साठ) हजार रुपैया के बैंक गाराइन्टी मांग होगइल (लेखक) प्रकाशक श्री नागेन्द्र प्रसाद कानु जी से । ओहघरी एह वीरगंज मे धनाढय लोगन के खास करके भोजपुरीया लोगमे कवनो कमी ना रहे बाकिर केकरोसे कवनो आर्थिक सहयोग प्राप्त ना भइलाापर वर्तमान निवास के मकान के जमीन वीरगंज नगर पंचायत कार्यालय मे मूल्यांकन कराके धरौटी मे राखलगइल तबजाके प्रकाशन करेके इजाजत प्राप्त होगइल ।

वि.सं.२०४० से लेके २०५३ तक अटुट रुपसे नेपाल के एकलौता भोजपुरी भाषामे पहिलका समाचार पत्र अधिराज्य के कोना कोना मे पूर्व मेची से लेके पश्चिम महाकाली तक, रक्सौल से पुरा विहार मे आ वीरगंज से काठमाण्डु तचक धामाका मचा देहलख, खुवे चारु ओरीया से सराहना मिलेलागल उत्साह आ उर्जा बढगइल बाकिर दुस्ख के बात इ बाटे छपाइ के महगाइ प्रकाशन खरच सें तंग होके अन्तोगत्वा आपन दम तुड लेहलख कारण विज्ञान के नामीललासे ।

हम भोजपुरीया लोगन से निहोरा करेम यदी भोजपुरी भाषा के आपन मातृ भाषा बुझतवानी त भोजपुरी मे प्रकाशित पुस्तक, पत्रिका, उपन्यास, लेख, समाचार-पत्र के हृदय से लगाइ कुछ खरच करी खरीदी, विज्ञापन दी जेकरा से भोजपुरीया लेखक, सचनाकार के लेखन करेके हौसला बढे आ अटुट रुपसे जीवन्त रहे भविष्य मे आएवाला पीढी के ढेर भोजपुरी ग्रन्थ प्राप्त होखे इतिहास होजाइ । साहित्य जगत मे धनिक होजाएम ।

गहवा, वीरगंज पर्सा

अंक २, भोजपुरी आवाज साप्ताहिक, २०७० श्रावन १४ गते मे प्रकाशित

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