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दुष्ट को के कुरा

लागे छ आगो मन भित्र नै जलन को के कुरा
आशा रोपी अनन्त न पाउनु निरासाको के कुरा
झिकी खुसी अरुको नाच्छन ती दुष्ट को के कुरा
समाजका ब्याधी नै देश हाक्ने नेतृत्वको के कुरा

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