
लाल सारीमे हरिएर किनारी
पहिरि ओढिए धिया सुकुमारी
जखन पुजलाय बैसल पावनि
गोरनार धिके निहारल रघुरारी
आजु हेतैन तेसर सिनुरदान
अही कुल सँ हेति धिया विरान
बाबुके बेटी पुतहुवा कहेथिन
दूर जाक उगथिन अतके चान
पान-टाका लय आँखि मुनेतैन
फुल सन बदन पर टेमी दगेतैन
छैक ई अजगुत रीत बड भारी
एक मिथिलानी किया डरेतैन?
जकरा छल पोसल नैनमे बसाइ
सेहो धिया हेथिन आब पराई
इयाह छैक अहिठामक चलन
कहिक मोनमा रखथिन बुझाइ
सुधा मिश्र
जनकपुर -४
धनुषा,नेपाल
