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तिमी हरायौ या म यो शहर शून्य पाएँ
सपना हो कि विपना, हर रहर शून्य पाएँ
न तिमी आउनुको हर्ष न जानुको विस्मात
न बचे न मरे, माया भन्ने जहर शून्य पाएँ

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